एक शतक से भी अधिक समय से चली आ रही परंपरा आज भी कायम, जिसको देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा

एक शतक से भी अधिक समय से चली आ रही परंपरा आज भी कायम, जिसको देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा
संजय सिंघलडग-कस्बे में सौ वर्षों से भी अधिक समय से चली आ रही परंपरा आज भी कायम है जिसको देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है ।
कस्बे में धुलेंडी पर्व के दिन हर वर्ष संध्या समय मे चौकड़ी दरवाजा स्थित हनुमान मंदिर परिसर में धधकते अंगारों से नंगे पैर श्रद्धालुओं का निकलने का सिलसिला जारी है ।
इस दौरान हनुमान जी और वेरई माता की विशेष पूजा अर्चना के बाद चूल का आयोजन होता है जिसमें 15 फीट लंबी, डेढ़ फीट चौड़ी एवं सवा 2 फीट गहरी खाई खोदकर उसमें 2 क्विंटल लकड़ी के अंगारे तैयार कर उनको 20 किलो शुद्ध देसी घी से धधकाया जाता है जिसपर श्रद्धालु नंगे पैर गुजरते हैं । शुक्रवार शाम को भी लगभग 71 महिला, पुरुष और बच्चे नंगे पैर धधकते अंगारों पर नंगे गुजरे। जिसको देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग यहां पर पहुंचे। उक्त जानकारी मंदिर समिति सदस्य पंकज वाशरमेंन दी।



