नगर पालिका की लापरवाही: इंदिरा नगर में आ रहा है गंदा पानी, वार्ड वासियों में भारी आक्रोश
समस्या का समाधान नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन, अधिकारियों को भेंट की जाएंगी चूड़ियां

नगर पालिका की लापरवाही: इंदिरा नगर में आ रहा है गंदा पानी, वार्ड वासियों में भारी आक्रोश
● एक माह से गंदा और बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं लोग, पार्षद ने कहा— “कुंभकर्णी नींद सो रहा है प्रशासन, कभी भी हो सकती है बड़ी महामारी”
● समस्या का समाधान नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन, अधिकारियों को भेंट की जाएंगी चूड़ियां
नीमच। नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 7, इंदिरा नगर विस्तार में इन दिनों जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। क्षेत्र में पिछले एक महीने से लगातार गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई हो रही है, जिससे वार्ड वासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। हैरानी की बात यह है कि बार-बार की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार नगर पालिका अधिकारियों और कर्मचारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
अधिकारी सो रहे हैं कुंभकर्णी नींद: पार्षद
क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती सुमित्रा मुकेश पोरवाल ने नगर पालिका प्रशासन और जलकल विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘कुंभकर्णी नींद’ में सोने का आरोपी ठहराया है। पार्षद ने बताया कि:
”पिछले एक महीने से पूरा वार्ड गंदे पानी की समस्या से त्रस्त है। मैंने स्वयं कई बार लिखित में और मौखिक रूप से वरिष्ठ अधिकारियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अधिकारी इसे ठंडे बस्ते में डाले हुए हैं। ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या महामारी का इंतजार कर रहा है। कभी भी इंदौर जैसी जल-जनित बीमारी की घटना यहाँ घटित हो सकती है, शायद उसके बाद ही यह सोया हुआ प्रशासन जागेगा।”
एसी कमरों से बाहर निकलकर ग्राउंड पर आएं सीएमओ
वार्ड वासियों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को केवल दफ्तर में बैठने के बजाय वार्डों का जमीनी दौरा करना चाहिए। एसी कमरों में बैठकर जनता की इस बुनियादी और गंभीर समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता। पूरे वार्ड में गंदे पानी की सप्लाई से लोग बीमार हो रहे हैं और अब उनके सब्र का बांध टूट रहा है।
उग्र आंदोलन और घेराव की चेतावनी
वार्ड वासियों ने नगर पालिका को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि जलकल विभाग की पूरी टीम को तुरंत काम पर लगाया जाए और गंदे पानी के स्रोत (लीकेज या मिक्सिंग) को ढूंढकर इसका स्थाई समाधान किया जाए। यदि बदबूदार पानी से आम जनता को तत्काल निजात नहीं मिली, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।



