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चंबल की लहरों के बीच विराजे भोलेनाथ, साल में सिर्फ़ कुछ महीनों के लिए खुलते हैं दिव्य दर्शन

चंबल की लहरों के बीच विराजे भोलेनाथ, साल में सिर्फ़ कुछ महीनों के लिए खुलते हैं दिव्य दर्शन

बंशीदास बैरागी मगराना

मंदसौर जिले के हिंगोरिया बड़ा के पास मां चंबल की शांत लहरों के बीच विराजमान भगवान भोलेनाथ का अद्भुत और अलौकिक स्वरूप इन दिनों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। मंदसौर जिले के बड़ा हिंगोरिया के पास रेतम क्षेत्र में शिवना और चंबल नदी के संगम तट पर स्थित विख्यात एलवी महादेव मंदिर इन दिनों आस्था, प्रकृति और रहस्य का अद्भुत संगम बना हुआ है।

सालभर चंबल नदी के पानी में डूबा रहने वाला यह प्राचीन मंदिर गर्मी के दिनों में जैसे ही नदी का जलस्तर कम होता है, वैसे ही धीरे-धीरे पानी से बाहर आने लगता है और भगवान भोलेनाथ के दिव्य दर्शन शुरू हो जाते हैं। चारों ओर फैला नीला पानी, बीच में उभरता प्राचीन मंदिर और मंदिर तक पहुंचती नावें ऐसा दृश्य प्रस्तुत करती हैं, मानो प्रकृति ने स्वयं भोलेनाथ का दरबार सजाया हो।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वर्षों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद मंदिर की संरचना आज भी मजबूत और आकर्षक बनी हुई है। मंदिर की दीवारें, गर्भगृह और शिवलिंग आज भी उसी आस्था और भव्यता के साथ श्रद्धालुओं का स्वागत करते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग इसे भोलेनाथ का चमत्कार मानते हैं।

इन दिनों श्रद्धालु नाव और स्टीमर बोट के जरिए मंदिर तक पहुंच रहे हैं। संगम तट का मनमोहक नजारा और चंबल की लहरों के बीच गूंजते “हर हर महादेव” के जयकारे पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं। सुबह से शाम तक यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। दूर-दूर से लोग इस अनोखे मंदिर के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार साल में केवल तीन से चार महीने ही मंदिर में दर्शन संभव हो पाते हैं। बारिश शुरू होते ही चंबल नदी का जलस्तर बढ़ जाता है और पूरा मंदिर फिर से पानी में समा जाता है। यही कारण है कि इस दुर्लभ दृश्य को देखने और भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य, नदी की लहरों और आस्था के संगम के बीच विराजमान एलवी महादेव मंदिर इन दिनों श्रद्धा का सबसे खूबसूरत केंद्र बना हुआ है।

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