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पशुओं का स्वास्थ्य प्रबंधन ही बेहतर उत्पादन की कुंजी डॉ. विवेक सिंह

पशुओं का स्वास्थ्य प्रबंधन ही बेहतर उत्पादन की कुंजी डॉ. विवेक सिंह

गोरखपुर पीपीगंज पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार माना जाता है और पशुओं का अच्छा स्वास्थ्य ही बेहतर उत्पादन की सबसे बड़ी कुंजी है। महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, पीपीगंज के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. विवेक प्रताप सिंह ने बताया कि पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान देकर दूध, मांस व अन्य उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है, जिससे पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होती है।उन्होंने कहा कि पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले स्वच्छता जरूरी है। पशुशाला की नियमित सफाई, सूखा और हवादार वातावरण तथा गोबर और गंदगी का उचित निस्तारण रोगों के प्रसार को रोकता है। इसके साथ ही पशुओं को स्वच्छ पानी और संतुलित आहार देना आवश्यक है। हरा चारा, सूखा चारा और दाना उनकी आयु व उत्पादन क्षमता के अनुसार देना चाहिए, साथ ही खनिज मिश्रण और नमक का उपयोग उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।डॉ. सिंह ने बताया कि रोगों की रोकथाम के लिए समय-समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवाओं का प्रयोग बेहद जरूरी है। खुरपका-मुंहपका, गलाघोंटू और लंगड़ा बुखार जैसे खतरनाक रोगों से बचाव के लिए निर्धारित समय पर टीके लगवाना चाहिए। उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराते रहें, ताकि किसी भी बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सके।उन्होंने यह भी कहा कि यदि पशुओं के व्यवहार, भूख या दूध उत्पादन में अचानक बदलाव दिखे तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।अंत में उन्होंने बताया कि स्वच्छता, संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण और समय पर उपचार अपनाकर पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखा जा सकता है। स्वस्थ पशु ही अधिक उत्पादन देते हैं और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाते हैं।

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