बर्डियाखेड़ी में रामकथा: श्रीराम जन्मोत्सव, बाल लीलाओं और पारिवारिक संस्कारों का दिया संदेश ~साध्वी सीताबहन

बर्डियाखेड़ी में रामकथा: श्रीराम जन्मोत्सव, बाल लीलाओं और पारिवारिक संस्कारों का दिया संदेश ~साध्वी सीताबहन
दलौदा।ग्राम बर्डियाखेड़ी में आयोजित नवदिवसिय श्री रामकथा के पाँचवे दिवस कथा व्यास साध्वी सीताबहन वनदेवी आश्रम ओम्कारेश्वर ने भगवान श्रीराम एवं उनके तीनों भाइयों भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए आसपास के गांवों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा पंडाल में भगवान श्रीराम के जयकारों और भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा व्यास ने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ने लगे, तब भगवान विष्णु ने मानव कल्याण और धर्म की स्थापना के लिए राजा दशरथ के घर श्रीराम के रूप में अवतार लिया। उनके साथ भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का भी जन्म हुआ। चारों भाइयों के जन्म से अयोध्या नगरी आनंद और उत्सव से भर उठी। नगर में दीप जलाए गए, दान-पुण्य किया गया और हर ओर खुशियां मनाई गईं।
कथा में भगवान श्रीराम और उनके भाइयों की बाल लीलाओं का भी सुंदर वर्णन किया गया। व्यासजी ने बताया कि चारों भाई बचपन से ही मर्यादा, अनुशासन, विनम्रता और आपसी प्रेम के प्रतीक थे। उन्होंने अपने माता-पिता और गुरुजनों का सदैव सम्मान किया तथा समाज को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा दी। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथा के दौरान व्यासपीठ से साध्वी जी ने आधुनिक जीवन से जुड़े विषयों पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन आज के समय में उपयोगी साधन है। इसके माध्यम से शिक्षा, व्यापार, बैंकिंग, चिकित्सा और संचार के क्षेत्र में अनेक सुविधाएं प्राप्त होती हैं। विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं, किसान मौसम और कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तथा लोग दूर बैठे परिजनों से आसानी से संपर्क बनाए रख सकते हैं।
हालांकि उन्होंने मोबाइल के दुष्प्रभावों के प्रति भी सावधान किया। उन्होंने कहा कि आवश्यकता से अधिक मोबाइल का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। कई लोग सोशल मीडिया में इतना समय व्यतीत करते हैं कि परिवार के साथ संवाद कम हो जाता है। इसलिए तकनीक का उपयोग आवश्यकता और संयम के साथ करना चाहिए।
कथा व्यास ने पारिवारिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि जिस परिवार में सास और बहू मिल-जुलकर कार्य करती हैं, वहां सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। यदि सास बहू को बेटी का स्नेह दे और बहू सास को मां का सम्मान दे, तो परिवार आदर्श बन जाता है। उस परिवार में राम राज्य की इस्थापन हो सकती है कथा के अंत में महाआरती के साथ प्रसादी वितरण किया गया तथा श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। कथा का समापन 17 जून को श्री गणेश मंदिर प्राण प्रतिष्ठा एवं विशाल भंडारे के साथ होगा


