प्रेम करना है तो भगवान से करों यह फलदाई और सुखदाई होता है – स्वामी श्री केशवानंद जी

प्रेम करना है तो भगवान से करों यह फलदाई और सुखदाई होता है – स्वामी श्री केशवानंद जी
मंदसौर। पुरूषोत्तम (अधिक) मास के अवसर पर केशव सत्संग भवन, खानपुरा में पुरूषोत्तम (अधिक) मास के शुभ अवसर पर पूज्य पाद केशवनानंद जी महाराज चिन्मय मशीन आकोला ने नारद भक्ति सूत्र पर आधारित दिव्य प्रवचनों का आयोजन प्रात: 8.30 बजे से 10 बजे तक हो रहा है।
दिनांक 25 मई 2026, सोमवार को नारद भक्ति सूत्र का वाचन करते हुए केशवनानंद जी महाराज चिन्मय मशीन आकोला ने बताया कि नारद मुनि बताते है कि प्रेम करना है तो भगवान से करों यह फलदाई और सुखदाई होता है लेकिन सांसारिक मनुष्य भगवान के स्थान पर भौतिक वस्तुओं से प्रेम करने लगता है पहले यह सुखदाई लगता है लेकिन वास्तव में भोग विलास की प्रत्येक वस्तु हमारे दुख का बडा कारण है। आपने कहा कि सभी जगहों से मन को समेटकर भगवान में लगाना चाहिए फिर हमारा जीवन सुखमय हो जायेगा। मनुष्य ऐसा नहीं करते हुए अपने मन को सांसारिक चीजो में लगाके रखता है भगवान का सत्संग सुनने भी आयेगा तो उसका मन व्यापार, परिवार में लगा रहेगा ऐसा करने से उसकी भक्ति पूर्ण नहीं हो पाती। आपने बताया कि इस दुनिया में भगवान को छोडकर कोई चीज सुख नहीं दे सकती भौतिक चीजों से सुख मिलेगा यह केवल हमारा भ्रम होता है। प्रेम दर्शन में नारद मुनि भक्ति सूत्र के माध्यम से यही बताना चाह रहे है कि सबसे बड़ा सिर्फ ईश्वर है और भक्ति मार्ग से भगवान से प्रेम कर भगवान को प्राप्त किया जा सकता है।
आप ने बताया कि आज संसार में शरीर को विश्राम देनी की हजारों वस्तुएं है आज कल तो उठकर पंखा भी बंद नहीं करना पड़ता वह भी रिमोट वाला आ गया है शरीर को विश्राम देने के कई विकल्प है वैज्ञानिक भी इस पर दिन रात काम कर रहे है लेकिन मन को विश्राम देने पर कोई विचार नहीं करता मन को विश्राम दोगे तभी असली सुख मिलेगा।
इस अवसर पर जगदीशचंद्र सेठिया, कारूलाल सोनी, मदनलाल गेहलोत, मदनलाल देवड़ा, जगदीशचंद्र गर्ग, घनश्याम भावसार, पं शंकर लाल त्रिवेदी, पं शिवनारायण शर्मा, संतोष जोशी, डॉ प्रमोद कुमार गुप्ता, प्रवीण देवड़ा सहित बडी संख्या में महिलाएं एवं पुरूष उपस्थित थे।



