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बछोड़िया हादसा: विभाग का दावा बिना पूछे चला रहे थे लाइट, तो फिर घटनास्थल से ‘सबूत’ किसने हटाए

रिपोर्टर जितेंद्र सिंह चंद्रावत जडवासा

बछोड़िया हादसा: विभाग का दावा बिना पूछे चला रहे थे लाइट, तो फिर घटनास्थल से ‘सबूत’ किसने हटाए

बछोड़िया/सुखेड़ा | बछोड़िया में ईंट भट्टा संचालक जितेन्द्र प्रजापत की करंट लगने से हुई मौत के मामले में विद्युत वितरण केंद्र सुखेड़ा के कर्मचारियों का अजीबोगरीब तर्क सामने आया है।

विभाग के मेंटेनेंस हेल्पर का कहना है कि मृतक ने बिना अनुमति के बिजली चला रखी थी। हालाँकि, विभाग का यह बयान मामले को सुलझाने के बजाय और अधिक उलझा रहा है!

पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह पुष्टि हो चुकी है कि मौत ‘सिंगल फेज मोटर’ से लगे करंट के कारण हुई है। सवाल यह है कि यदि विभाग का दावा है कि मृतक बिना अनुमति के बिजली का उपयोग कर रहा था, तो विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं थी? बछोड़िया फिटर का मेंटेनेंस देखने वाले कर्मचारियों की मौजूदगी इलाके में रोजाना होती है। ऐसे में सीधे लाइन से बिजली का प्रवाह जारी रहना और विभाग को इसकी खबर तक न होना—यह स्वयं में सुखेड़ा वितरण केंद्र की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान है।

सबसे संदिग्ध बात यह है कि जैसे ही हादसा हुआ, विभाग के वही कर्मचारी वहां पहुँचे और पुलिस के आने से पहले ही उन तारों को खोलकर गायब कर दिया, जिनसे करंट दौड़ा था। यदि विभाग का तर्क सही है, तो उन्हें पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई करनी चाहिए थी, न कि आनन-फानन में साक्ष्य मिटाने की। विभाग का यह कहना कि ‘वह बिना पूछे चला रहा था’, अपनी जिम्मेदारी से बचने का बहाना मात्र लग रहा है। सच्चाई यह है कि विभाग के तकनीकी अमले की जानकारी या अनदेखी के बिना इस तरह सीधे लाइन से बिजली का चलना संभव नहीं है।

फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मौत के कारणों की पुष्टि कर दी है। अब पुलिस को यह तय करना है कि क्या विभाग का यह बयान केवल बचाव है, या फिर विभाग के कर्मचारी खुद उस ‘भ्रष्टाचार’ के खेल को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं जो लंबे समय से चल रहा था। विभाग के इस बयान ने अब यह साबित कर दिया है कि वे इस मामले को ‘सिर्फ एक हादसा’ बताकर फाइलों को बंद करना चाहते हैं, लेकिन साक्ष्य मिटाने की उनकी फुर्ती किसी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही है।

विभाग का यह कहना कि ‘मृतक बिना पूछे चला रहा था’, उनकी अपनी जवाबदेही से भागने की कोशिश है। यदि वास्तव में कोई अनधिकृत उपयोग था, तो विभाग ने पूर्व में कोई जुर्माना या एफआईआर क्यों नहीं की? इसका कोई रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।

न्याय की मांग: पीड़ित परिवार को मिले आर्थिक संबल

“विद्युत विभाग सुखेड़ा की लापरवाही और असुरक्षित विद्युत आपूर्ति की भेंट चढ़े जितेन्द्र प्रजापत की मौत से उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में करंट से मौत की पुष्टि हो चुकी है। प्रशासन से हमारी मांग है कि विभाग अपनी जवाबदेही तय करे और पीड़ित परिवार को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान करे, ताकि बेसहारा हुए परिवार को संबल मिल सके।”

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