शहडोल और अनूपपुर जंगलों में आतंक का पर्याय बने जंगली हाथी ‘E-5’ का आखिरकार रेस्क्यू किया

शहडोल और अनूपपुर जंगलों में आतंक का पर्याय बने जंगली हाथी ‘E-5’ का आखिरकार रेस्क्यू किया
तीन लोगों की जान लेने वाले इस हाथी को काबू करना नामुमकिन लग रहा था, लेकिन बांधवगढ़ के एक पालतू हाथी रामा की दोस्ती ने इस खतरनाक ऑपरेशन को बेहद भावुक मोड़ दे दिया।
अधिकारियों के मुताबिक, यह हाथी स्वभाव से हिंसक नहीं था, बल्कि अपने झुंड के छत्तीसगढ़ लौट जाने के कारण अकेलेपन और गहरे तनाव यानी डिप्रेशन से जूझ रहा था ।शुरू में वन विभाग ने उसे काबू करने के लिए 3 बार ट्रेंकुलाइजर नशे का इंजेक्शन दिया। लेकिन वह पिंजरा तोड़कर भाग गया। फिर बांधवगढ़ के पालतू हाथी ‘रामा’ के संपर्क में आते ही वह शांत हो गया। इसके बाद जंगली हाथी ‘E-5’ को वन विभाग की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है।
करीब 47 दिनों तक शहडोल और अनूपपुर के ग्रामीण इलाकों में आतंक मचाने के बाद, उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खितौली वन परिक्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।
बांधवगढ़ में छोड़े जाने के बाद, ‘E-5’ नए झुंड में शामिल नहीं हुआ। वह करीब 20 किलोमीटर आगे बढ़कर वापस छत्तीसगढ़ सीमा की ओर बढ़ रहा है। वन विभाग की टीमें उस पर चौबीसों घंटे नज़र रख रही हैं।
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