पर्यावरणमंदसौरमध्यप्रदेश
उद्यानिकी महाविद्यालय में हरित स्नातक उपाधि कार्यक्रम के तहत ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पौधारोपण किया गया

चार वर्षों तक पौधों की देखभाल करेंगे विद्यार्थी, हरित स्नातक उपाधि कार्यक्रम से बढ़ेगी हरित जिम्मेदारी
वृक्षारोपण से मानव श्रृंखला तक, मंदसौर उद्यानिकी महाविद्यालय में पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश
मन्दसौर। उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर में अधिष्ठाता डॉ. दीपक हरि रानडे के मार्गदर्शन में हरितस्नातक उपाधि कार्यक्रम (जीजीडीपी) के तहत‘एक पेड़ माँ के नाम’पौधारोपणकार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना रहा।इस अवसर पर बी.एससी. के विद्यार्थियों द्वारा महाविद्यालय परिसर में 200 फलदार पौधों की विभिन्न प्रजातियों जैसे जामफल, सीताफल इत्यादि पौधों का रोपण किया गया। प्रत्येक विद्यार्थी को एक-एक पौधे की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसका निर्वहन वे अपनी संपूर्ण डिग्री अवधि तक करेंगे। इसके साथ ही पौधों के समुचित विकास के लिए ग्रीन ग्रेजुएशन स्थल पर ट्यूबवेल के माध्यम से नियमित सिंचाई की भी व्यवस्था की गई।पौधारोपण के उपरांत विद्यार्थियों ने हरित संकल्प (ग्रीन ओथ) लेते हुए पर्यावरण की रक्षा हेतु अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनके संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। विद्यार्थियों ने जैव विविधता के संरक्षण, जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण तथा प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग से बचने की शपथ ली। साथ ही उन्होंने स्वच्छ, स्वस्थ, हरित एवं सतत भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने, स्वयं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने तथा समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरित करने का संकल्प लिया।इसके उपरांत विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाकरअधिकाधिक पौधारोपण, जैव विविधता के संरक्षण तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराने का प्रभावी संदेश दिया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. दीपक हरि रानडे ने अपने उदबोद्धन में कहा कि ष्एक पेड़ माँ के नामष्कार्यक्रमपौधारोपण के साथ साथ, मातृत्व के सम्मान, प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता का एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान है।इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को अपनी माँ के सम्मान में कम-से-कम एक पौधा लगाने एवं उसकी देखभाल के लिए प्रेरित करना है।डॉ. रानडे ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन, कृषि एवं पर्यावरण संतुलन का आधार हैं। बढ़ते प्रदूषण, घटते वन क्षेत्र एवं जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान व्यापक वृक्षारोपण और उनके संरक्षण में निहित है। उद्यानिकी के विद्यार्थियों का योगदान इस अभियान में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वे पौध उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों को सीखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत हरित विकास के संदेशवाहक भी बनते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रत्येक पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षित रखने का आह्वान किया।
हरित स्नातक उपाधि कार्यक्रम की नोडल अधिकारी कु. अल्पना कुम्हरे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता एवं सतत विकास की भावना विकसित करने का एक अनूठा प्रयास है। साथ हीउन्होंनेविद्यार्थियों कोहरित स्नातक उपाधि कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम वर्ष के प्रत्येक विद्यार्थी को एक पौधा आवंटित किया जाता है, जिसकी देखभाल उसके द्वारा संपूर्ण डिग्री अवधितक किया जाता है। विद्यार्थी द्वारा पौधे की नियमित देखभाल के साथ साथसिंचाई, निराई-गुड़ाई, खाद उपलब्धता तथा संरक्षण सुनिश्चित किया जाता है, जिससे पौधा स्वस्थ एवं सुदृढ़ वृक्ष के रूप में विकसित हो सके। समय-समय पर जीजीडीपी के समिति सदस्यों द्वारा पौधों का मूल्यांकन किया जाता है।शैक्षणिक काल के अंतिम वर्ष तक जिन छात्रों का पौधा जीवित एवं स्वस्थ्य होता है, उनको ही प्रमाण पत्र हेतु सत्यापित किया जाता है। प्रतिवर्ष विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को स्नातक डिग्री के साथ साथ हरित स्नातक उपाधि कार्यक्रम का भी प्रमाण पत्र दिया जाता है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों ने विद्यार्थियों के उत्साह की सराहना की साथ ही विद्यार्थियों से अपने-अपने पौधों की जिम्मेदारी निभाने तथा उन्हें विकसित वृक्ष बनने तक संरक्षित रखने का आह्वान किया।अंत में कार्यक्रम प्रभारी कु. अल्पना कुम्हरे ने सभी उपस्थित विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।


