समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 17 मार्च 2026 मंगलवार

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जल महोत्सव अंतर्गत जल अर्पण दिवस का आयोजन किया गया
रतलाम : सोमवार, मार्च 16, 2026,

जल निगम द्वारा जिला रतलाम के ग्राम जड़वासा खुर्द में आज 16 मार्च को जल महोत्सव के अंतर्गत जल अर्पण दिवस का आयोजन कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह के नेतृत्व में तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत कलश यात्रा, रंगोली, जल बंधन सहित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। प्रातः काल ग्राम में ढोल-बाजों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें ग्रामवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद सदस्य श्री सुरेश पाटीदार द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक संकल्प पर अपने विचार व्यक्त किए गए। आयोजित प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही सरपंच श्रीमती पुष्पा परमार, उपसरपंच श्री मांगीलाल एवं सचिव श्री दिलीप सिसोदिया को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सरपंच प्रतिनिधि श्री सुरेश परमार जड़वासा खुर्द द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में ग्रामवासी, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षकगण, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, छात्र-छात्राएं, वरिष्ठ ग्रामीणजन उपस्थित थें।
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राजस्व अधिकारियों द्वारा गैस एजेंसियों के वितरण केन्द्रों का निरीक्षण किया गया
रतलाम : सोमवार, मार्च 16, 2026,

जिले में उपभोक्ताओं को घरेलू गैस सिलेंडर की निर्बाध आपूर्ति के लिए कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह के निर्देशानुसार जिले में राजस्व अधिकारियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में गैस एजेंसियों के वितरण केन्द्रों का निरीक्षण किया जा रहा है।
प्रशासन द्वारा घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी के तहत आज 16 मार्च को शिवगढ़ गैस गोदाम का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान गैस स्टॉक, रिकॉर्ड एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई। ताल तहसील अंतर्गत कालूखेड़ा गैस गोदाम की जांच की गई। अधिकारियों द्वारा गैस सिलेंडरों के रखरखाव एवं वितरण व्यवस्था का जायजा लिया गया एवं शासन के निर्देशानुसार वितरण व्यवस्था सुचारू रखने के निर्देश दिए गये।
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सफलता की कहानी
लखपति दीदी बनीं पद्मा कुँवर, डेयरी व्यवसाय से हर महीने 30-40 हजार रुपये की आय
रतलाम : सोमवार, मार्च 16, 2026

स्वयं सहायता समूह की लाभार्थी श्रीमती पद्मा कुँवर निवासी ग्राम कलालिया तहसील जावरा ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर मेरे जीवन में बड़ा बदलाव आया है। शिव शक्ति समूह से जुड़ने से पहले पद्मा केवल घर के कार्यो तक ही सीमित थीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और वे समाज से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय हुईं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत समूह के माध्यम से पद्मा ने ऋण लेकर गायें खरीदीं। अब वे अपने पति के साथ मिलकर डेयरी व्यवसाय संचालित कर रही हैं। इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने लगभग 30 से 40 हजार रुपये तक की आय हो रही है।
पद्मा ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में आ चुकी है। उन्होंने इस सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) तथा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन पाई हैं।
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प्रधानमंत्री श्री मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में की भेंट
किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर लिया मार्गदर्शन
रतलाम : सोमवार, मार्च 16, 2026,
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नई दिल्ली में पुष्प-गुच्छ भेंटकर स्वागत कर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के साथ प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही राज्य में किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों तथा प्रदेश की प्रगति से अवगत कराया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि विकास, किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में कई पहलें की जा रही हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया।
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जल है तो कल है का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
म.प्र. नदियों का मायका, जल आत्मनिर्भरता से ही बनेगा समृद्ध प्रदेश प्रदेश में 19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान 100 दिवसीय अभियान में जल संरक्षण के होंगे कार्य नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन में होगा राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ वृहद् अभियान के लिए सरकार कर रही व्यापक तैयारियाँ
रतलाम : सोमवार, मार्च 16, 2026,
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है।
जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है।
दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से
वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
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