उज्जैन में 2 साल का बच्चा बना बाल आरक्षक, एसपी प्रदीप शर्मा ने चॉकलेट खिलाकर सौंपा नियुक्ति प्रमाण पत्र

उज्जैन में 2 साल का बच्चा बना बाल आरक्षक, एसपी प्रदीप शर्मा ने चॉकलेट खिलाकर सौंपा नियुक्ति प्रमाण पत्र
ड्यूटी के दौरान पिता की सड़क दुर्घटना में हुई थी मौत, मध्यप्रदेश में पहली बार नन्हे मनवीत को मिली अनुकंपा नियुक्ति; परिवार को आर्थिक संबल देने की पहल
उज्जैन। पुलिस की वर्दी पहनकर देश और समाज की सेवा करने का सपना देखने की उम्र से भी अनजान दो वर्षीय मासूम मनवीत को मध्यप्रदेश पुलिस में बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। सेवा के दौरान अपने पिता को खो चुके इस नन्हे बालक के परिवार को आर्थिक संबल देने की दिशा में उज्जैन पुलिस ने संवेदनशील पहल की है। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने 14 अक्टूबर 2026 को मनवीत को बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की। इस अवसर पर उन्होंने मासूम को अपने हाथों से चॉकलेट खिलाकर स्नेह और आशीर्वाद दिया।
पुलिस विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में दो वर्षीय बच्चे को बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का यह पहला मामला है। इस पहल ने पुलिस विभाग के मानवीय पक्ष को सामने लाने के साथ ही कर्तव्य के दौरान अपने प्रियजन को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया है।
ड्यूटी के दौरान सड़क हादसे में हुई थी पिता की मौत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरक्षक क्रमांक 464 रणजीत सिंह डोडिया मंदसौर जिले में पदस्थ थे। 26 जनवरी 2026 को सेवा के दौरान सड़क दुर्घटना में उनका असामयिक निधन हो गया था। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार में पत्नी ज्योति कुंवर, दो पुत्रियां और दो वर्षीय पुत्र मनवीत हैं। कम उम्र में ही पिता का साया उठ जाने से परिवार के सामने भावनात्मक संकट के साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई थी।
मंदसौर में पद रिक्त नहीं होने पर उज्जैन भेजा गया प्रकरण
आरक्षक रणजीत सिंह डोडिया के निधन के बाद उनकी पत्नी ज्योति कुंवर ने अपने पुत्र मनवीत को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान किए जाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। मंदसौर जिले में पद रिक्त नहीं होने के कारण प्रकरण वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से उज्जैन पुलिस अधीक्षक के पास भेजा गया।
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने मामले में तत्परता दिखाते हुए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराईं और मनवीत को बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की। इस तरह विभाग ने दिवंगत आरक्षक के परिवार को राहत पहुंचाने की दिशा में कदम उठाया ।



