इंदौरमध्यप्रदेश

घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाज़ारी एवं अवैध उपयोग के मामले में केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई; पेट्रोलियम मंत्रालय को जांच के निर्देश

घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाज़ारी एवं अवैध उपयोग के मामले में केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई; पेट्रोलियम मंत्रालय को जांच के निर्देश

इंदौर। घरेलू (14.2 किलोग्राम) एलपीजी सिलेंडरों का व्यावसायिक कार्यों एवं वाहनों में अवैध उपयोग, कालाबाज़ारी, इससे होने वाली राजस्व हानि तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग ने गंभीर संज्ञान लिया है। ‘ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन’ द्वारा प्रस्तुत शिकायत पर कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग ने इस मामले को आगे की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भेज दिया है।

क्या है मामला?

‘ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन’ की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसमें निम्नलिखित गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था:

सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा: 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से ‘टिल्लो पंप’ के माध्यम से पाइप लगाकर अवैध रूप से वाहनों तथा व्यावसायिक सिलेंडरों में गैस रिफिल की जा रही है। इससे विस्फोट एवं दुर्घटनाओं का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है तथा यात्रियों एवं आम नागरिकों के जीवन को जोखिम है।

सरकारी राजस्व का नुकसान: घरेलू एलपीजी पर 5% जीएसटी लागू है, जबकि व्यावसायिक एलपीजी पर 18% जीएसटी लगाया जाता है। घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग किए जाने से सरकार को 13% जीएसटी राजस्व का नुकसान हो रहा है।

कालाबाज़ारी एवं गैस एजेंसियों की मिलीभगत: शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ एलपीजी वितरकों और कालाबाज़ारी करने वालों की मिलीभगत से ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर ग्राहकों की जानकारी के बिना अथवा उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बुकिंग दिखाकर घरेलू सिलेंडरों को कालाबाज़ारी में भेजा जा रहा है।

स्थानीय साक्ष्य: फाउंडेशन ने 159 जिलों के 59,900 से अधिक होटल, ढाबों, फास्ट फूड सेंटरों एवं रेस्टोरेंट्स की सूची साक्ष्यों सहित सरकार को प्रस्तुत की है, जहां घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के निर्देश

उपभोक्ता मामले विभाग के अवर सचिव विकास कुमार द्वारा 29 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार यह मामला आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।

इसलिए ‘ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन’ द्वारा प्रस्तुत शिकायत एवं साक्ष्यों की गहन जांच कर दोषियों तथा संबंधित गैस एजेंसियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने के निर्देश पेट्रोलियम सचिव को दिए गए हैं।

ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन की भूमिका:

उपभोक्ता अधिकारों एवं सार्वजनिक सुरक्षा के लिए कार्यरत ‘ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन’ ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। फाउंडेशन ने केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में संचालित अवैध गैस रिफिलिंग रैकेट तथा दोषी गैस वितरकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करने और केंद्र सरकार के राजस्व को होने वाले नुकसान को रोकने की मांग की है।

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