दो प्रकार कि स्त्रियां एक सूर्पनखा रुप बदलकर दिखावा करती ओर दुसरी शबरी शिवमय होकर सहज बनी जिसे राम का आशीर्वाद मिला – डॉ पं.नागर जी

कथा के पांचवें दिन बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त, रामेश्वरम धाम कथा पांडाल हुआ शिवमय

सीतामऊ।छोटी काशी की पावन धरा पर रामेश्वर धाम में शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस का ज्ञान अमृत पान करते हुए डॉक्टर मिथिलेश जी नागर ने कहा कि नैमिषारण्य की पावन धरा पर सूतजी महाराज ने 88 हजार ऋषि मुनियों को शिव योगी बने परिवार राष्ट्र के कल्याण का महत्व बताते हुए शिव महापुराण कथा का श्रवण कर रहे हैं।डॉ नागर जी ने कहा कि भोलेनाथ का विवाह संस्कार संपन्न होकर कैलाश पर्वत पर निर्विघ्न रह रहे थे। और राजा दक्ष प्रजापति ने यज्ञ हवन का आयोजन में सबको बुलाया पर भोलेनाथ दामाद को आमंत्रित नहीं किया। कि कथा श्रवण कराते हुए आगे कहा कि एक बार सभी देवता राजा दक्ष के आगमन पर सम्मान में खड़े हुए पर महादेव खड़ा नहीं होने को देखकर दक्ष को लगा कि मेरे सम्मान में मेरा दामाद खड़ा नहीं हुआ और अपने ही अपने ही अंदर प्रतिशोध रखा। कुछ दिन बाद कनखल हरिद्वार में दक्ष ने हवन यज्ञ का आयोजन किया जिसमें दामाद से भोलेनाथ को नहीं बुलाया। यज्ञ हवन में जाने को लेकर भोलेनाथ से सती ने कहा पर भोलेनाथ ने कहा कि बिना निमंत्रण के नहीं जाना चाहिए पर सती नहीं मानी और बिना निमंत्रण के पहुंची। और अपनी मां से पूछा कि सबको निमंत्रण दिया और हमें निमंत्रण क्यों नहीं दिया तथा पिता से भी सभी देवताओं के आसान लगे देखकर कहा कि मेरे पति का आसान क्यों नहीं लगाया तो दश ने कहा कि तुझे नहीं बुलाया तू क्यों आई सती उमा बोली में किस मुंह से जाऊं कि मेरे पिहर में पति का भी सम्मान नहीं है।डॉ पं नागर जी ने कहा कि इस कथा के पीछे का सार यह है कि पति ने जो बात कही वह पत्नी समझे नहीं करें नहीं तो अपमानित भी होना पड़ता है। सती महादेव के कहने पर भी नहीं मानी और गई जहां अपने पति का अपमान देखकर यज्ञ हवन में उमा कुदकर देह त्याग दी यह खबर महादेव को लगी तो उन्होंने वीरभद्र को प्रकट कर नंदी गणों के साथ दक्ष के हवन स्थल पर भेजा जहां वीरभद्र ने हाथ से दक्ष का सर अलग कर यज्ञ हवन को विध्वंस कर दिया। इधर महादेव क्रोध की आग से जल रहे थे तो सभी देवताओं ने शांत करने के लिए प्रार्थना की। डॉक्टर पंडित नगर की में कथा के माध्यम से कहा कि जब भी किसी में क्रोध आए तो उसे शांत करने के लिए का कार्य विनम्रता के साथ करना चाहिए तथा अपने में शिवयोग जागृत करने और देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए प्रतिदिन 6 मिनट पूजन प्रार्थना 21 दिनों तक लगातार करें यदि कुछ प्राप्त हो तो आगे करना जारी रखें नहीं तो बंद कर देना।
डॉ पं नागर जी ने कथा में कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी बुराई करे तो वह आंखों में कांटे की तरह लगने लगता है और कोई आपकी प्रशंसा कर दे तो आप राजी हो गए इसका मतलब यह है कि आप में शिवयोग नहीं जगा है। डॉ पं नागर जी ने कहा कि यहां रोज आकर केवल 3 घंटे कथा सुनकर घर चले जाने से कुछ नहीं होता है कुछ पाने का लक्ष्य ललक हो तो शिव से एकाकार होकर यहां बैठना पड़ेगा तो ही शिवयोग की प्राप्ति होगी। डॉ पंडित नागर जी ने गृह क्लेश को लेकर कहा कि पति पत्नी के बीच तीन कर्म से ही लड़ाई होती हैं पहले भोजन को लेकर दूसरा कपड़े को लेकर और तीसरा पैसे को लेकर होती है। यदि इन तीनों में एक दूसरे में भाव जागृत होकर किया जाए तो झगड़ा खत्म हो जाएगा। डॉ पंडित नगर ने कहा कि अपने आप को स्थिर प्रकृति में रहना सीखो जो स्वयं प्रकृति में जैसा है वैसा रहना सीखो अपना मूल्यांकन खुद करें में जैसा हूं वैसा हूं कैसे किसी का अच्छा कर सकता हूं अच्छा बोल सकता हूं यह बनना पड़ेगा वह शिवमय में बन जाता है। डॉ पंडित नागर जी ने राम कथा के सुग्रीव राम मिलन को लेकर कहां की सुग्रीव में राम से अपने परिचय में कहा कि मैं आदम से एडम हूं मैं गरीब से गरीब हूं। आपने आगे कहा की मानस में दो स्त्रियां थी एक सूर्पनखा और दूसरी शबरी सूर्पनखा शिव में नहीं बन पाई क्योंकि वह रावण की बहन थी जो रूप बदलना जानती थी और रूप बदलकर राम के पास गई वह अपने को बदलकर अच्छा दिखना चाहती थी पर वह दिखा रही थी अंदर से वैसी नहीं थी। वहीं शबरी जैसी थी वैसी ही राम से मिली उसने कोई बदलाव नहीं किया क्योंकि वह स्थिर प्रकृति के साथ शिवमय थी। शबरी ने राम को बेर खिलाकर आशिर्वाद पा लिया। शिव में बनने के लिए अपने जीवन की डोरी भगवान देवाधिदेव महादेव के हाथों में अर्पण करना होगी।
कथा ज्ञानामृत श्रवण के अवसर पर विभिन्न समाज जनों सामाजिक संगठन ऑन कर्मचारियों अधिकारियों पुलिस प्रशासन पत्रकारों ने भगवान देवाधिदेव महादेव के वांग्मय स्वरूप शिव पुराण का दर्शन पूजन एवं डॉक्टर पंडित मिथिलेश जी नागर का फूल माला से स्वागत अभिनंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष मनोज शुक्ला उपाध्यक्ष सुमित रावत परिषद के जनप्रतिनिधि समाजसेवी सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति भक्तजन पुरुष उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ का सुबह 08 बजे से प्रतिदिन पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक किया जा रहा है जिसमें भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु द्वारा अभिषेक कर देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद प्राप्त किया जा रहा है।कथा मंचीय संचालन नपं सभापति विवेक सोनगरा ने किया।



