सीतामऊ में स्कूल ड्रेस का बढ़ता कारोबार: चुनिंदा दुकानों तक सीमित व्यवस्था, अभिभावकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

सीतामऊ में स्कूल ड्रेस का बढ़ता कारोबार: चुनिंदा दुकानों तक सीमित व्यवस्था, अभिभावकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
सीतामऊ। नगर में स्कूल खुलने के साथ ही किताबों के बाद अब स्कूल ड्रेस का कारोबार भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि अधिकांश निजी स्कूलों की ड्रेस केवल चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध कराई जा रही है, जहां बिना किसी छूट के तय और मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ वर्ष पहले तक स्कूल ड्रेस के लिए केवल कपड़ा निर्धारित किया जाता था, जिसे अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी दर्जी से सिलवा लेते थे। लेकिन अब अधिकांश स्कूलों में रेडीमेड ड्रेस अनिवार्य कर दी गई है। इन ड्रेसों की गुणवत्ता ऐसी बताई जा रही है कि वे एक सत्र से अधिक उपयोग में नहीं आ पातीं, जिससे हर साल अभिभावकों को नई ड्रेस खरीदने के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
अभिभावकों का आरोप है कि कई स्कूलों ने अपनी ड्रेस की बिक्री के लिए चुनिंदा दुकानदारों को ही अधिकृत कर रखा है। इससे अभिभावकों के पास विकल्प नहीं बचता और उन्हें उसी दुकान से तय कीमत पर ड्रेस खरीदनी पड़ती है। इस व्यवस्था से कमीशनखोरी और मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिल रहा है। जिला कलेक्टर एवं स्थानीय प्रशासन को इस व्यवस्था की जांच कर, स्कूल ड्रेस की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। ताकि शिक्षा के बढ़ते व्यापारीकरण पर रोक लगाई जा सके और अभिभावकों को राहत देने के लिए प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।



