सरकारी सिस्टम की हकीकत,जीते जी नहीं नसीब हुई पक्की छत, मां-बेटे की मौत के बाद प्रशासन ने फेंका 9 लाख का ‘मुआवजा’!

सरकारी सिस्टम की हकीकत,जीते जी नहीं नसीब हुई पक्की छत, मां-बेटे की मौत के बाद प्रशासन ने फेंका 9 लाख का ‘मुआवजा’!
-पंकज जैन टकरावद
जिंदा थे तो चक्कर कटवाए, मर गए तो तिजोरी खोल दी! सिंगोली हादसे के बाद जागा प्रशासन; मां-बेटे की जान के बदले 9 लाख!
सरकारी सिस्टम का खेल यह यह कोई सिंगोली मे ही नहीं सभी जगह यही हालत है शासकीय योजनाओं की जरूरत मंद को शासन की योजनाओं का लाभ देर से मिलता है लेकिन रसूक दार उन योजनाओ का पूरा ही फायदा पहले ही उठा लेते व कोई कुछ नहीं कर सकता गरीबो को समय पर आवास नहीं, किसानो को समय पर खाद नहीं, बीज बूआई के बाद आता फिर मल्हारगढ़ की रेतम फार्मर प्रोडयुसर जैसी कम्पनीया उस बीज को किसानो के नाम चढ़ा कर बाजार मे बेच देते व जबाबदार आँख मुंद कर देखते किसानो की फ़सल मार्केटिंग मे तुलने मे देरी व रसूकदारों के पिछले दरवाज़े से इंट्री कर तुलाई हो जाती हॉस्पिटलो मे डॉक्टर नहीं, मंडी मे किसानो का माल बाहर व व्यापारियो को माल छपरो मे एसी अनेक योजनाओं जो जरूरत मंदो को मिलना चाहिए वह समय पर नहीं मील रही केवल हथेलियों पर हाथी दोड़ा कर बता रहे सरकार डीजल बचाने व सोना नहीं खरीदने का आग्रह घर घर जाकर समझाने की बोलती जबकि गरीबो के पास न गाड़िया है सोना खरीदने की क्षमता काफिले लेकर नेता चलते सोना वो खरीदते व आमजन से बचत करने के लिए उपवास करने की बात करते
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