कृषकों के लिये समसामयिक सलाह, फसल अवशेष के समुचित प्रबंधन उपरांत खेत की जुताई करें

कृषकों के लिये समसामयिक सलाह, फसल अवशेष के समुचित प्रबंधन उपरांत खेत की जुताई करें
फसल अवशेष के समुचित प्रबंधन उपरांत आवश्यकतानुसार मिट्टी पलट हल, डिस्क हैरो, कल्टीवेटर (पंजा), रोटावेटर द्वारा खेत की जुताई करें। खेत की जुताई के बाद लैंड लेवलर द्वारा भूमि समतलीकरण (लैंड लेवलिंग) अवश्य करें जिससे मिट्टी कटाव एवं जलभराव में कमी होगी और फसल उत्पादन में वृद्धि होगी। खरीफ फसलों में प्रयोग होने वाली सीड ड्रिल की आवश्यकतानुसार मरम्मत करवाकर बोई जाने वाली फसलानुसार उचित बीज दर हेतु समायोजन करें।
मिर्च की फसल में थ्रिप्स एवं सफ़ेद मक्खी के प्रबंधन के लिए 5-6 नीले चिपचिपे ट्रेप प्रति बीघा की दर से लगावे। वर्तिसिलिउम लेकनी की 3 ग्राम मात्रा या थाएमी थोक्षाम 25% डबल्यूजी की 0.3 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी मे घोल बनाकर छिड़काव करे।
संतरा, नींबू में गमोसिस या गोंदिया रोग को नियंत्रित करने के लिए रोगग्रस्त छाल को हटावे तथा बोर्डो पेस्ट (1 किलो नीला थोथा, 1 किलो बिना बुझा चूना और 10 लीटर पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं) का ब्रश की मदद से साफ किए गए तने पर जमीन से 2-3 फीट की ऊंचाई तक लेप करें। यदि संक्रमण हो तो मेटालैक्सिल पेस्ट जो की मेटालैक्सिल एमजेड 68% डब्ल्यूपी की 50 ग्राम मात्रा को 1 लीटर पानी में मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं और इसे प्रभावित तने के भाग पर लेपन करें। यह क्रिया बारिश से पहले करे।
खरीफ प्याज तथा अन्य खरीफ सब्जियों जैसे फूलगोभी, टमाटर, बैंगन, मिर्च आदि कि नर्सरी ऊंची ऊठी हुई क्यारियों में तैयार करें तथा बीजों को कतारों में बोएं। जो किसान भाई अमरूद व संतरा के नये बगीचे लगाने के इच्छुक है वे 60 से.मी. गहरा तथा 60 से.मी. चौड़ा गड्डा करें। यह समय अदरक व हल्दी की बुआई के लिए उपयुक्त है इन फसलों के बीजों की बुवाई से पूर्व फंफूदीनाशक दवा से आवश्य उपचारित करें।


