जब विनाश मनुष्य पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है – श्री मनोज महाराज जी

श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में कल श्रीकृष्ण जन्मोत्सव व कथा श्रवण कराई जाएगी
सीतामऊ। ओल्ड इज़ गोल्ड पहले बैलगाड़ी थी गौ माता का पालन होता था हम खुद लकड़ियां ईंधन जुटाते थे। हम पहले भी गुलाम थे और आज भी गुलाम हो गये सब सरकार के भरोसे एलपीजी सारी चीजें कितनी गंभीर स्थिति हो रही है। उक्त बात शहनाई गार्डन सीतामऊ में आयोजित श्रीमद् भागवत महोत्सव के प्रथम दिवस सोमवार को पंडित श्री मनोज जी दवे ने श्रवण कराते हुए कहीश्री दवे ने कहा कि आज के पढ़े लिखे लोग ज्यादा जीते हैं या पहले के कम पढ़े लिखे लोग जीते हैं। सबकुछ व्यवस्थाएं है पर आज का मानव 50-60 से ज्यादा नहीं जीता है पुराने बाप दादा अधिक जीतें क्योंकि पहले सात्विक आहार, जीवन था। हमने अपनी संस्कृति को छोड़ दिया।गौ माता कि सेवा बंद कर दी। भागवत कथा को सम्राट पुराण कहा गया। भगवत गीता और श्रीमद् भागवत पुराण में अंतर है। भागवत मुल में 4श्लोक है और भगवत गीता में 18 अध्याय है जिनको भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में श्रवण कराए थे।और भागवत पुराण में 18000 श्लोक 12 स्कंद है ऐसा सुंदर ग्रंथ यहां विराजमान हैं। श्रीमद् भागवत पुराण होती है वहां 17 पुराण और आते है।जिसका अनुभव आप स्वयं यहां बैठकर कर सकते हैं। पंडित श्री दवे ने कहा कि हम यह नहीं कि कथा श्रवण करने से कोई पाप या दुःख कम हो जाएगा। कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा” जीव जैसा कर्म करेगा उसे वैसा फल मिलता है।जीवन में दुख नहीं आए तो सुख कि परिभाषा भी नहीं पता चलती। कथा के दुसरे दिन मंगलवार को पंडित दवे जी ने कहा कि मीरा बाई का भगवान कि भक्ति के प्रति समर्पण भाव को बताया और कहा कि विष जहर विपदा भी सहन पिया जा सकता है। इस प्रकार आपने विभिन्न कथा के प्रसंगों द्वारा उपस्थित धर्म प्रेमी जनों को ज्ञानामृत पान कराया। कथा के तृतीय दिवस बुधवार को पंडित श्री दवे ने श्रवण कराते हुए कहा कि एक गंगा हरिद्वार में है जहां जाने के लिए रिजर्वेशन करवाना पड़ता है। और यहां ज्ञान गंगा बह रही है। इसके लिए भाव चाहिए। बाजार जाते हैं तो भाव से ही खरीदते हैं। ऐसे ही भाव अगर मन में है तो ठाकुर जी अपने पास ही है। ठाकुर जी हमारे हम ठाकुर जी के ये होना चाहिए और कुछ नहीं। भागवत जी प्रथम मंगलाचरण से आगे कि कथा श्रवण कराते हुए कहा कि हाथों से परिवार कि खुब सेवा करें पर मन के भाव को भगवान से लगाएं रखें कथा के आगे के प्रसंग गौरा कुम्हार,कौरव पांडव पंडित श्री दवे जी ने कहा कि बहन बेटियों को अच्छे और सुंदर वस्त्र पहने चाहिए द्रोपदी कि तरह भगवान उनकी रक्षा करने आते हैं। जहां पवित्रता और सात्विकता होती है वहां भगवान संत सभी आते हैं। बाणों कि शय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने भगवान श्रीकृष्ण पांडव कि और से दूत बनकर गये पर कौरव ने पांडवों को मात्र पांच गांव देने से भी मना कर दिया। भगवान ने दुर्योधन को बडंआ समझाया पर ये माने नहीं, पंडित श्री दवे जी ने कहा कि जब विनाश मनुष्य पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है उल्टा हरि को बांधने का काम भी कर देता है।
कथा यजमान श्री पुरुषोत्तम माहेश्वरी ने बताया कि प्रभु श्री हरि कि कृपा से प्रतिदिन श्रद्धेय पंडित श्री मनोज महाराज जी दवे के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में ज्ञान गंगा का सौभाग्य प्राप्त हुआ है जो 18 मई से 24 मई 2026 रविवार तक शहनाई गार्डन में प्रतिदिन दोपहर 12.15 बजे से 4 बजे तक आयोजित हो रही है कल गुरुवार को भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव कि कथा का आयोजन होगा। श्री माहेश्वरी ने सभी धर्म प्रेमी जनो से अनुरोध करते हुए कहा कि अधिक से अधिक पधार कर कथा श्रवण कर ज्ञानामृत लाभ प्राप्त करें।



