महासंयोग: 26 साल में चौथी बार 14 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ

सुहागिनें रखेंगी निर्जला व्रत, दोपहर में गणेशजी की स्थापना, शिव-पार्वती और गणेश पूजन का विशेष संयोग
शामगढ़ नगर सहित आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार 14 सितंबर सोमवार को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाई जाएगी। तिथि-भेद के कारण बने इस संयोग में सुहागिनें अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। दोपहर में मध्याह्न-व्यापिनी चतुर्थी तिथि में भगवान श्रीगणेश की स्थापना के साथ गणेश उत्सव शुरू होगा।
ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग खास माना जा रहा है क्योंकि एक ही दिन भगवान शिव, माता पार्वती और उनके पुत्र भगवान गणेश की आराधना होगी।
पं.विक्रम पुरोहित के अनुसार 14 सितंबर को उदय काल में तृतीया तिथि होने से हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा। तृतीया सुबह 7:07 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। यह 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में माना गया है इसलिए 14 सितंबर को दोपहर के समय चतुर्थी तिथि होने से इसी दिन गणेशजी की स्थापना की जाएगी। पंचांग के अनुसार 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक चतुर्थी रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इसलिए 15 सितंबर के मध्याह्न में चतुर्थी तिथि नहीं रहेगी। इसलिए गणेश चतुर्थी का पूजन और स्थापना 14 सितंबर को ही करना शास्त्रोक्त माना जाएगा। इसे लेकर शहर में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना और उत्सव की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का एक ही दिन आना दुर्लभ संयोग माना जा रहा है। वर्ष 2000 के बाद यह स्थिति 2004, 2011, 2023 और अब 2026 में बनी है। इससे पहले 2023 में भी तिथियों के कारण चतुर्थी को लेकर अलग-अलग मत सामने आए थे।
तिथि पर एक नजर – 14 सितंबर: सुबह 7:07 बजे तक तृतीया। इसके बाद चतुर्थी। दोपहर में गणेश स्थापना, 15 सितंबर: सुबह 7:44 बजे तक चतुर्थी। इसके बाद पंचमी। मध्याह्न में चतुर्थी नहीं होने से स्थापना 14 को ही।
*सोमवार के साथ नक्षत्र और योग पर्व का बना रहा विशेष संयोग*
इस बार दोनों पर्व सोमवार को पड़ रहे हैं। सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की आराधना की जाती है। ऐसे में शिव-पार्वती और गणेशजी के पूजन का एक ही दिन होना इस पर्व को विशेष बना रहा है। 14 सितंबर को चित्रा नक्षत्र दोपहर 1:55 बजे तक रहेगा। इसके बाद स्वाति नक्षत्र शुरू होगा। यह 15 सितंबर दोपहर 3:21 बजे तक रहेगा। इसके साथ ब्रह्म और ऐंद्र योग का संयोग भी रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन योग-नक्षत्रों में पूजा-अर्चना को सुख-समृद्धि और मनोकामना-पूर्ति के लिए शुभ माना जाता है। 14 सितंबर को सुहागिनें हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करेंगी। दोपहर में भगवान गणेश की स्थापना होगी। यानी एक ही दिन शिव, पार्वती और गणेश, संपूर्ण शिव परिवार की पूजा का विशेष अवसर बनेगा ।



