मल्हारगढ़मंदसौर जिला

संजीत क्षेत्र में मूक पशु के साथ अमानवीयता, भीषण गर्मी में चारों पैर बांधकर छोड़ने का आरोप

संजीत क्षेत्र में मूक पशु के साथ अमानवीयता, भीषण गर्मी में चारों पैर बांधकर छोड़ने का आरोप

मंदसौर जिले के संजीत ग्राम पंचायत क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में एक बेल/सांड के चारों पैर रस्सियों से बांधकर खुले मैदान में भीषण गर्मी के बीच छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि पशु को इस हालत में मरने के लिए जानबूझकर छोड़ा गया था।

तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि मूक पशु तेज धूप में जमीन पर पड़ा हुआ है और उसके हाथ-पैर मजबूती से बांधे गए हैं। यदि यह मामला सत्य पाया जाता है, तो यह न केवल पशु क्रूरता का गंभीर मामला है बल्कि भारतीय कानूनों के तहत दंडनीय अपराध भी है।

पशु क्रूरता अधिनियम के तहत अपराध

भारत में पशुओं के साथ क्रूरता रोकने के लिए Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 लागू है।

धारा 11 – पशुओं के साथ क्रूरता

यदि कोई व्यक्ति किसी पशु को:

अनावश्यक पीड़ा पहुंचाता है,

भूखा-प्यासा छोड़ता है,

बांधकर कष्ट देता है,

मरने की स्थिति में छोड़ देता है,

तो यह पशु क्रूरता की श्रेणी में आता है।

ऐसे कृत्य पर कानूनी कार्रवाई एवं दंड का प्रावधान है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) / पूर्व IPC के तहत अपराध

धारा 325 BNS (पूर्व IPC 429)

यदि किसी पशु को जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाई जाती है या उसकी मृत्यु होती है, तो यह आपराधिक कृत्य माना जाता है।

धारा 289

पशु के प्रति लापरवाही या खतरनाक तरीके से व्यवहार करना भी अपराध की श्रेणी में आता है।

ग्राम पंचायत का दायित्व

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी होती है कि:

आवारा एवं घायल पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे,

पशुओं के संरक्षण हेतु उचित व्यवस्था करे,

पशु क्रूरता की सूचना पर तत्काल कार्रवाई करे,

पशु चिकित्सा विभाग एवं पुलिस को सूचित करे।

यदि पंचायत क्षेत्र में इस प्रकार की घटना होती है और शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।

प्रशासन से मांग

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि:

पशु को तत्काल चिकित्सा सहायता दी जाए,

दोषियों की पहचान कर एफआईआर दर्ज की जाए,

पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई हो,

पंचायत एवं जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब लिया जाए।

मूक पशुओं के साथ इस प्रकार की क्रूरता समाज में संवेदनहीनता को दर्शाती है। प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी

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