भीषण गर्मी में बिजली कंपनी के खिलाफ फूटा जनाक्रोश

“ईस्ट इंडिया कंपनी की तर्ज पर जनता को लूट रही बिजली कंपनी”,
सैकड़ों किसानों और ग्रामीणों ने अधीक्षक यंत्री कार्यालय का किया घेराव, उग्र आंदोलन की चेतावनी
पिपलिया स्टेशन (निप्र)। जिले में भीषण गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटौती, फर्जी बिजली बिलों, किसानों के उत्पीड़न, ओवरलोड ट्रांसफार्मरों और बिजली विभाग की कथित मनमानी के विरोध में सोमवार को मंदसौर शहर में व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला। मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र से किसान नेता श्यामलाल जोकचंद व मंदसौर के दीपकसिंह गुर्जर के नेतृत्व में सैकड़ों किसान, ग्रामीण एवं सामाजिक कार्यकर्ता बीपीएल चौराहा पर एकत्रित हुए, जहां से विशाल बाइक रैली के रूप में चंबल कॉलोनी स्थित अधीक्षक यंत्री कार्यालय पहुंचे और कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने करीब एक घंटे तक नारेबाजी करते हुए बिजली विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया तथा चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो जिलेभर में उग्र जनआंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान “बिजली कंपनी होश में आओ”, “किसानों का शोषण बंद करो” और “अघोषित कटौती बंद करो” जैसे नारे गूंजते रहे। घेराव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने बिजली कंपनी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस प्रकार अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत की जनता का आर्थिक और मानसिक शोषण किया था, उसी प्रकार आज बिजली कंपनी आम उपभोक्ताओं और किसानों को लूटने का कार्य कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय कर्मचारी कंपनी के दबाव में आम जनता को प्रताड़ित कर रहे हैं तथा किसानों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विजिलेंस टीमों के माध्यम से किसानों पर झूठे प्रकरण बनाए जा रहे हैं। फर्जी बिजली चोरी के आरोप लगाकर भारी-भरकम बिल थमाए जा रहे हैं तथा पुलिस प्रशासन के माध्यम से किसानों को अपराधियों की तरह आधी रात को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया किसानों के आत्मसम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कुठाराघात है। जोकचंद ने कहा कि मंदसौर जिले सहित संपूर्ण मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती ने आमजन का जीना दूभर कर दिया है। दिन और रात में कई-कई बार बिजली बंद की जा रही है, जिससे आमजन, व्यापारी, विद्यार्थी और किसान सभी परेशान हैं। भीषण गर्मी में बिजली कटौती के कारण छोटे बच्चे, बुजुर्ग एवं मरीज सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है, वहीं किसानों की सिंचाई व्यवस्था भी चरमरा गई है। उन्होंने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली लाइन और ट्रांसफार्मरों के रख-रखाव में भारी लापरवाही बरती जा रही है। जगह-जगह टूटे हुए तार, झुके हुए बिजली पोल और खुले ट्रांसफार्मर हादसों को न्योता दे रहे हैं। हर वर्ष करंट लगने से कई लोगों एवं मवेशियों की मौत हो रही है, लेकिन विभाग जिम्मेदारी लेने के बजाय पीड़ित परिवारों को मुआवजे के लिए कार्यालयों के चक्कर कटवा रहा है। गाय, भैंस, बैल और बकरियों सहित कई पशुओं की मौत होने के बाद भी प्रभावित परिवारों को राहत नहीं मिल रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत सदस्य दीपकसिंह गुर्जर ने कहा कि बिजली विभाग में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था चरम पर पहुंच चुकी है। नए कनेक्शन, ट्रांसफार्मर बदलने और लाइन सुधार के नाम पर उपभोक्ताओं से अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर रहे हैं, जिससे जनता में गहरा असंतोष है। उन्होंने कहा कि “लोड सेटिंग” और “मेंटेनेंस” के नाम पर घंटों बिजली बंद रखना आम उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है। बिजली विभाग की कार्यशैली के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा छोटे उद्योग और व्यवसाय भी संकट में आ गए हैं। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में पूरा देश भीषण गर्मी का सामना कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय बिजली काट दी जाती है। बिजली चालू कराने के लिए विभागीय कर्मचारियों को फोन लगाने पर कई बार फोन तक नहीं उठाए जाते। जबकि उपभोक्ताओं से समय पर भारी बिजली बिल वसूले जाते हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि “अनअप्रूव्ड चार्ज” के नाम पर उपभोक्ताओं से 12 हजार से अधिक राशि जबरन वसूली जा रही है। वहीं कई क्षेत्रों में क्षमता से कम ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं, जिससे आए दिन ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाएं हो रही हैं। राकोदा गांव और मंदसौर शहर के संजीत नाका क्षेत्र का उदाहरण देते हुए वक्ताओं ने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद विभाग स्थायी समाधान नहीं कर रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग में लाइनमैनों की भारी कमी है। जहां दो गांवों पर एक लाइनमैन होना चाहिए, वहां 10 से 15 गांवों की जिम्मेदारी एक ही कर्मचारी पर डाली जा रही है। आउटसोर्स कर्मचारियों से बिना सुरक्षा उपकरणों के खतरनाक कार्य करवाए जा रहे हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में बनी रहती है। वक्ताओं ने कहा कि यदि बिजली विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, किसानों पर दर्ज प्रकरण वापस नहीं लिए, अघोषित कटौती बंद नहीं की और बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं की, तो आने वाले समय में जिलेभर में व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस अवसर पर किसान नेता कमलेश पटेल, भगतराम डाबी, सुरेश भाटी एवं सम्यक जैन सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। सभी ने किसानों और उपभोक्ताओं के साथ हो रहे कथित अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन में पिपलिया कृषि मंडी के पूर्व अध्यक्ष बंशीलाल पाटीदार, काचरिया चंद्रावत सरपंच ईशु धनगर, मल्हारगढ़ जनपद पंचायत सदस्य रामेश्वर राठौर, युवा कांग्रेस नेता राजेश भारती, कमलिया के पूर्व सरपंच जुझारसिंह, बरखेड़ापंथ के पूर्व सरपंच दिनेश कारपेंटर, नेनोरा के पूर्व सरपंच रमेश पाटीदार, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र धनगर, पूर्व बैंक डायरेक्टर रघुवीरसिंह सोनगरा, ब्लाक कांग्रेस पूर्व प्रवक्ता महेश गुप्ता हिंगोरिया, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष शीतलसिंह दौरवाड़ा, गफ्फार भाई रंगरेज, धीरज धाकड़, याकूब मेव, रघुवीरसिंह गुर्जर, बलराम गुर्जर, दिलीप गुर्जर, कृष्णकांत माली, कोमलराम बघेरिया, सुरेश धनगर, महेश गुप्ता, भारतसिंह भाटी, वसीम खान, धर्मेंद्र गोस्वामी, रघुवीर गुर्जर, याकूब मंसूरी, राकेश कुमावत, सुरेश पाटीदार, मुकेश धनगर, गोपाल पटेल बालागुड़ा, मुकेश टेलर, राजेंद्रसिंह भाटी, राहुल कठेरिया, रघुनाथसिंह चंदेल, भरत पाटीदार, रमेश मालवीय, राजेश मालवीय, इंजीनियर वसीम खान, आशीष सुथार, राजकुमार धनगर, कोमल बावरिया, कृष्णकांत बावरिया, मंदसौर जनपद सदस्य रामप्रसाद परमार, डॉ. फरीद शेख, उदयराम पटेल, मदनसिंह दुर्वाला, ओमप्रकाश टेलर, अशरफ अजमेरी, गोविंदसिंह डोराना, दिलीप गुर्जर, नैनसिंह गुर्जर, दिनेश पाटीदार, राहुल कीथिरिया, मुकेश चौहान, राजेन्द्र भाटी एवं शाहिद सहित बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण व कांग्रेसजन मौजूद रहे। प्रदर्शन के अंत में बिजली विभाग को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की गई कि क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती तत्काल बंद की जाए, किसानों को फर्जी मामलों में जेल भेजने की कार्रवाई रोकी जाए, टूटे हुए तारों और जर्जर विद्युत लाइनों की तत्काल मरम्मत की जाए, दुर्घटनाओं में मृत व्यक्तियों एवं पशुपालकों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए तथा बिजली उपभोक्ताओं के साथ हो रहे कथित शोषण पर तत्काल रोक लगाई जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो गांव-गांव में आंदोलन तेज किया जाएगा तथा बिजली विभाग के खिलाफ व्यापक जनसंघर्ष और चक्काजाम किया जाएगा।
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