खाद के लिए सड़कों पर भटक रहा अन्नदाता, सरकार की लापरवाही किसानों पर पड़ रही भारी

अब किसान जागेगा, तभी व्यवस्था सुधरेगी — किसान नेता श्यामलाल जोकचंद
मल्हारगढ़। खरीफ सीजन अपने चरम पर है, लेकिन खेतों में फसल की चिंता करने वाला किसान आज खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। मंदसौर जिले की सहकारी समितियों में अव्यवस्था, पोर्टल की त्रुटियां, गिरदावरी की गलतियां और खाद की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। यह स्थिति किसी एक गांव या एक किसान की नहीं, बल्कि पूरे जिले के हजारों किसानों की है।ताजा मामला मल्हारगढ़ के किसान शिवप्रकाश मांदलिया का सामने आया है। उन्होंने अपनी भूमि पर मक्का फसल का विधिवत पंजीयन कराया, लेकिन जब मल्हारगढ़ विपणन सहकारी संस्था में खाद लेने पहुंचे तो उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि राजस्व विभाग की गिरदावरी में उनकी फसल सोयाबीन दर्ज है। सवाल यह है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में गलती हुई है तो उसकी सजा किसान को क्यों दी जा रही है? किसान ने अपना कर्तव्य निभाया, लेकिन विभागों की लापरवाही का खामियाजा वही भुगत रहा है।
किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने कहा कि आज किसान खेत छोड़कर समितियों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद नहीं मिल रही। समय पर खाद नहीं मिलने से फसल प्रभावित होगी, उत्पादन घटेगा और किसान आर्थिक संकट में चला जाएगा। सरकार बार-बार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान को खेती के लिए आवश्यक खाद तक समय पर उपलब्ध नहीं हो रही।
उन्होंने कहा कि अन्नदाता को अपमानित करना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्म की बात है। जो किसान पूरे देश का पेट भरता है, आज वही अपने खेत बचाने के लिए सरकारी व्यवस्था के सामने बेबस खड़ा है। यदि यही हाल रहा तो इसका खामियाजा केवल किसान ही नहीं, बल्कि पूरा देश भुगतेगा।
श्यामलाल जोकचंद ने शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि तत्काल सभी तकनीकी त्रुटियों का निराकरण कर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए तथा किसी भी किसान को पंजीयन या गिरदावरी की गलती के नाम पर परेशान न किया जाए। अन्यथा किसान सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर होंगे।
उन्होंने जिले के किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा— “साथियों, यदि आज भी हम अपने हक और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी। वे पूछेंगी कि जब देश के अन्नदाता पर अन्याय हो रहा था, तब आप क्या कर रहे थे? इसलिए समय आ गया है कि किसान जाति, दल और विचारधारा से ऊपर उठकर अपने अधिकारों के लिए संगठित हों। संघर्ष ही किसानों के सम्मान और भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है।”



