सात्विक भक्ति सर्वश्रेष्ठ होती है – स्वामी श्री केशवानंद जी

सात्विक भक्ति सर्वश्रेष्ठ होती है – स्वामी श्री केशवानंद जी
मंदसौर। पुरूषोत्तम (अधिक) मास के अवसर पर केशव सत्संग भवन, खानपुरा में पुरूषोत्तम (अधिक) मास के शुभ अवसर पर पूज्य पाद केशवनानंद जी महाराज चिन्मय मशीन आकोला ने नारद भक्ति सूत्र पर आधारित दिव्य प्रवचनों का आयोजन प्रात: 8.30 बजे से 10 बजे तक हो रहा है।
दिनांक 28 मई 2026, गुरूवार को नारद भक्ति सूत्र का वाचन करते हुए केशवनानंद जी महाराज चिन्मय मिशन आकोला ने बताया कि नारद मुनि बताते है कि भक्ति के तीन प्रकार होते है जिसमें सात्विक, राजसिक और तामसिक होती है। सर्वश्रेष्ठ भक्ति सात्विक भक्ति को बताया गया है। तामसिक भक्ति अपना भी नुकसान करती है और दूसरों का भी तामसिक भक्ति का उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने बताया कि पुराने समय में असुर राक्षस लोग तपस्या करके भक्ति करके भगवान को प्रसन्न करते थे बाद में उनसे प्राप्त वरदान का दुर्पयोग करके आमजनों को परेशान करते थे भस्मासुर ने तो महा तपस्या करके भगवान शिव कोे प्रसन्न कर वरदान प्राप्त किया कि जिसके सिर पर हाथ रखंू, वह जलकर भस्म हो जायें भगवान ने भी उसे वरदान दे दिया बाद में वहीं भस्मासुर उनके पीछे भागने लगा उनके सिर पर हाथ रखने के लिए ऐसे तामसिक भक्ति के कई उदाहरण है। राजसिक भक्ति में भक्त अपनी कामनाओं को लेकर भगवान की भक्ति करता है, भगवान को प्रसन्न कर उनसे अपने लिए कुछ मान पद प्रतिष्ठा प्राप्त करना चाहता है। सात्विक भक्ति में भक्त भगवान की भक्ति करता है उनसे कुछ उपेक्षा नहीं करता लेकिन फिर परमपिता परमेश्वर भक्त की हर मनोकामना को पूर्ण करते है। इसलिए नारद भक्ति सूत्र में सात्विक भक्ति को सर्वश्रेष्ठ भक्ति बताया गया है और उसी भक्ति मार्ग से भगवान को जल्द प्रसन्न किया जा सकता है।
धर्मसभा में स्वामी जी ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति भक्ति तो करना चाहता है लेकिन उसका चंचल मन उसे यह नहीं करने देता है। आंखे बंद करके ध्यान लगाओंगे तो ध्यान में तो नहीं जाओंगे उस समय मन सांसारिक चीजों में लगा रहेगा इसलिए सबसे पहले मन के विकारों को दूर करके साफ निश्छल मन से मन को प्रभु भक्ति में लगाओं फिर देखना सात्विक भक्ति आयेगी और मन प्रसन्न होगा।
अधिक मास में हो रहे प्रवचनों में प्रतिदिन बडी संख्या में महिलाएं एवं पुरूष केशव सत्संग भवन आ हे है। केशव सत्संग भवन ट्रस्ट मंडल ने नगर की धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में प्रवचनों का लाभ लेने का निवेदन किया है।



