
सस्ते रिचार्ज प्लान अब हर प्लेटफॉर्म पर दिखाने होंगे
ट्राई (TRAI) के नए आदेश के अनुसार, अब सभी टेलीकॉम कंपनियों (Jio, Airtel, Vi, BSNL) को अपने सस्ते रिचार्ज प्लान और स्पेशल टैरिफ वाउचर (STV) वेबसाइट, ऐप और रिटेल स्टोर पर प्रमुखता से दिखाने होंगे। यह कदम कंपनियों द्वारा सस्ते प्लान छिपाने की शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिससे ग्राहकों को अब पारदर्शी विकल्प मिलेंगे।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण यानी ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए बड़ा निर्देश जारी किया है। अब कंपनियों को अपने सभी रिचार्ज प्लान और स्पेशल टैरिफ वाउचर हर प्लेटफॉर्म -वेबसाइट, मोबाइल ऐप और रिटेल स्टोर पर उपलब्ध कराने होंगे।ट्राई का नया निर्देश क्या है? भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे सभी रिचार्ज प्लान और स्पेशल टैरिफ वाउचर अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप और रिटेल स्टोर पर उपलब्ध कराएं और सस्ते प्लान को सबसे ऊपर दिखाएं। कंपनियों को इस नियम को लागू करने के लिए 21 दिन का समय दिया गया था, जिसकी समयसीमा अब पूरी हो चुकी है। यानी यह मंगलवार 14 अप्रैल से लागू माना जाएगा।
यह फैसला क्यों लेना पड़ा?
नियामक को शिकायतें मिली थीं कि कंपनियां सस्ते प्लान छिपा देती है या उन्हें ढूंढना मुश्किल बना देती हैं, जिससे ग्राहक महंगे प्लान लेने को मजबूर होते हैं। क्या सभी टेलीकॉम कंपनियों पर यह नियम लागू है? हां, यह नियम सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों पर लागू होगा, जिसमें रिलायंस जियो सहित अन्यकंपनियां भी शामिल हैं।
किस प्लान पर आपति थी?
ट्राई ने उन प्लान्स पर आपत्ति जताई थी जो केवल जियो फोन या जियो भारत जैसे खास डिवाइस के साथ ही उपलब्ध होते हैं।
क्या अब सस्ते प्लान ढूंढना आसान होगा?
हां, कंपनियों को सस्ते प्लान को वेबसाइट और ऐप पर ऊपर दिखाना होगा, जिससे ग्राहक आसानी से उन्हें देख और चुन सकेंगे।
स्पेशल टैरिफ वाउचर क्या है?
ये ऐसे रिचार्ज प्लान होते हैं जो सीमित समय या खास फायदे (डेटा, कॉलिंग या एमएमएस) के लिए बनाए जाते हैं।
इस फैसले से ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
सस्ते प्लान आसानी से मिलेंगे, पारदर्शिता बढ़ेगी, ग्राहकों को बेहतर विकल्प चुनने की आजादी मिलेगी। निर्देश के बाद प्लान न जारी करना नियमों के खिलाफ होगा और कार्रवाई हो सकती है। ट्राई ने हर वैलिडिटी पीरियड (28, 84, 365 दिन) के लिए ‘वॉइस+SMS’ प्लान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है, ताकि यूजर जबरन डेटा पैक लेने से बच सकें।



