
चुनाव आयोग ने पूरे देश में मतदाता सत्यापन अभियान शुरू करने की घोषणा की
चुनाव आयोग ने पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान शुरू करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को साफ करना और फर्जी या अवैध मतदाताओं को हटाना है। इस अभियान के तहत, मतदाता सूची में दर्ज पतों पर मतदाताओं की मौजूदगी की जांच की जाएगी, और मृत, स्थानांतरित, या दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं को हटाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया को बिहार मॉडल के आधार पर लागू किया जाएगा, जिसमें 11 दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन होगा। यह अभियान विशेष रूप से असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी लागू होगा, जहां घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने की शिकायतें रही हैं।
चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि अगस्त 2025 से पूरे देश में मतदाता सत्यापन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अवैध मतदाताओं, विशेष रूप से बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों से आए संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करना और उनकी फर्जी वोटर आईडी को हटाना है। इसके लिए मतदाताओं को अपनी नागरिकता, पहचान और निवास स्थान साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने होंगे।
बिहार में जून 2024 से शुरू हुए विशेष गहन पुनरीक्षण में अब तक 88% मतदाताओं का सत्यापन पूरा हो चुका है, और लगभग 5% अवैध प्रविष्टियां हटाई गई हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विवाद भी सामने आए हैं। कई लोगों और बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हुई है, जबकि आयोग का दावा है कि 95% सत्यापन पूरा हो चुका है।
मतदाता सूची में गड़बड़ियों को रोकने और फर्जी मतदान को खत्म करने के लिए यह सत्यापन जरूरी है। आयोग ने बायोमेट्रिक सत्यापन और आधार से लिंकेज जैसे उपायों को भी बढ़ावा दिया है, जिससे मतदाता पहचान की प्रामाणिकता बढ़ाई जा सके।
मतदाताओं को आधार, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे। बायोमेट्रिक सत्यापन: पहचान की सटीकता के लिए बायोमेट्रिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। पता सत्यापन: बूथ लेवल अधिकारी व्यक्तिगत रूप से मतदाताओं के पते की जांच करेंगे।
बिहार SIR का लक्ष्य: कोई योग्य मतदाता छूटने न पाए
- फॉर्म ना भरने वालों, मृतकों व स्थायी रूप से प्रवास कर चुके मतदाताओं की बूथ स्तर की सूची, BLO/ERO/DEO/CEO सभी राजनैतिक दलों से 20 जुलाई को साझा कर चुके हैं ताकि वे किसी भी त्रुटि को बता सकें।
- SIR ऑर्डर के अनुरूप, 1 सितंबर तक कोई भी निर्वाचक या कोई भी राजनीतिक दल नाम छूटने पर दावा या ग़लत नाम शामिल होने पर आपत्ति दे सकते हैं।
- 99% मतदाता कवर किये जा चुके हैं।
- स्थानीय BLOs/BLAs द्वारा 21.6 लाख मृत मतदाताओं के नाम पाए गए हैं।
- स्थानीय BLOs/BLAs द्वारा 31.5 लाख स्थायी रूप से प्रवास कर चुके मतदाताओं के नाम पाए गए हैं।
- स्थानीय BLOs/BLAs द्वारा 7 लाख मतदाताओं के वोट एक से ज़्यादा जगह पाए गए हैं।
- स्थानीय BLOs/BLAs के अनुसार, 1 लाख मतदाताओं का कोई पता नहीं चल पा रहा है।
- स्थानीय BLOs/BLAs के घर-घर दौरों के बावजूद भी, 7 लाख से कम मतदाताओं के फॉर्म अभी वापस नहीं मिले हैं।
- 7.21 करोड़ मतदाताओं (91.32%) के फॉर्म प्राप्त और डिजिटाइज्ड हो चुके हैं; इन सब मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल होंगे। बाक़ी फॉर्म भी BLO/BLAs की रिपोर्ट के साथ डिजिटाइज हो रहे हैं ताकि दावा व आपत्ति के समय जांच करने में आसानी हो।
- SIR ऑर्डर के अनुरूप, 1 अगस्त, 2025 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जानी हैं और सभी 12 राजनैतिक दलों को उसकी प्रिंटेड तथा डिजिटल कॉपी दे दी जाएगी; प्रारूप मतदाता सूची वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी। निर्वाचन आयोग एक बार फिर दोहराता है कि SIR के आदेशों के अनुरूप, 1 सितंबर तक, कोई भी निर्वाचक या राजनैतिक दल नाम छूटने पर दावा या ग़लत नाम शामिल होने पर आपत्ति दे सकते हैं।
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