
सांडा में ‘ब्लैक कोबरा’ के जहर से जंग
डॉक्टरों की जांबाजी और कांग्रेस नेता गोविंद सिंह सांडा की रफ्तार ने मौत के मुंह से छीनी आदिवासी महिला की जिंदगी
रतनगढ़। PHC में डॉ. मुजाल्दे की टीम ने लगाए 10 एंटी-वेनम, हालत बिगड़ी तो देवदूत बने पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष सांडा खुद स्टेयरिंग थामकर तूफान की रफ्तार से भागे नीमच; *कुल 30 इंजेक्शनों के भारी डोज के बाद बची बगदी बाई की सांसें
जावद। समय की कीमत को समझते हुए उठाया गया एक साहसिक और त्वरित कदम किस तरह किसी के लिए जीवनदायी ‘अमृत’ साबित हो सकता है, इसकी एक रोंगटे खड़े कर देने वाली मिसाल रतनगढ़ के समीप ग्राम सांडा में देखने को मिली।
यहाँ डॉक्टरों की अभूतपूर्व मुस्तैदी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व रतनगढ़ के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष गोविंद सिंह सांडा की अद्वितीय जांबाजी से एक 45 वर्षीय आदिवासी महिला को यमराज के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जहरीले काले नाग (ब्लैक कोबरा) के डंसने के बाद समय पर मिले इलाज और गोविंद सिंह सांडा द्वारा दिखाए गए अदम्य साहस की बदौलत महिला अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे नया जीवन मिला है।
ग्राम सांडा में पसरा सन्नाटा, जब नाग ने डंसा
घटना शुक्रवार की सवेरे करीब 10:40 बजे की है। रतनगढ़ के समीप ग्राम सांडा में उस समय हड़कंप और चीख-पुकार मच गई, जब एक 45 वर्षीय आदिवासी महिला बगदी बाई (पति शंभू लाल भील) को एक अत्यंत जहरीले काले नाग ने डस लिया। नाग के डंसते ही जहर ने अपना भीषण असर दिखाना शुरू कर दिया।
महिला की आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा और वह अचेत होने लगी। स्थिति बिगड़ती देख घबराए परिजन आनन-फानन में उन्हें लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) रतनगढ़ पहुंचे।
डॉक्टरों ने अस्पताल को बनाया ‘कमांडो पोस्ट’, संभाला मोर्चा
अस्पताल में महिला की बेहद नाजुक हालत और शरीर में तेजी से फैलते नीले जहर को देखते हुए रतनगढ़ पीएचसी के प्रभारी डॉ. मोहन मुजाल्दे अलर्ट मोड पर आ गए। उन्होंने तुरंत अपनी टीम के जांबाजों—पवन भंडारी, नेहा गोले एवं तारेश गवाला के साथ मिलकर आपातकालीन मोर्चा संभाल लिया। बिना एक सेकंड गंवाए डॉक्टरों ने सीधे जहर पर हमला बोला और महिला को तत्काल एक के बाद एक 10 एंटी-स्नेक वेनम (ASV) जीवनरक्षक इंजेक्शन ठोक दिए और लगातार गिरते ऑक्सीजन लेवल को संभालने के लिए हाई-फ्लो ऑक्सीजन सपोर्ट पर रख दिया।
जब ‘काल’ के खिलाफ लाइफ-लाइन बनी गोविंद सिंह सांडा की रफ्तार
प्राथमिक उपचार के बाद भी जब जहर का प्रकोप कम नहीं हुआ, तो डॉक्टरों ने महिला के फेफड़ों को बचाने के लिए उसे तत्काल जिला अस्पताल नीमच रेफर करने की सलाह दी।
ग्रामीण इलाके में एम्बुलेंस का इंतजार करना या किसी अन्य सरकारी प्रक्रिया में उलझना भगति बाई के लिए सीधा मौत का बुलावा होता।
ऐसे बेहद संवेदनशील और नाजुक क्षणों में कांग्रेस नेता गोविंद सिंह सांडा किसी देवदूत की तरह अस्पताल परिसर में आगे आए।
उन्होंने किसी और साधन या चालक का इंतजार करने के बजाय मानवता को सर्वोपरि रखा और तुरंत अपनी गाड़ी की चाबी उठाई। पीड़ित आदिवासी महिला को अपने निजी वाहन में लेटाया और खुद स्टेयरिंग थामकर समय के खिलाफ एक ऐतिहासिक दौड़ लगा दी।
रतनगढ़ से नीमच के कठिन रास्तों पर गोविंद सिंह सांडा ने अपने वाहन को ‘हवाई जहाज’ बना दिया और तूफान की रफ्तार से गाड़ी चलाते हुए रिकॉर्ड समय में नीमच जिला चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड के सामने जा रोका। प्रत्यक्षदर्शियों और डॉक्टरों का कहना है कि सांडा ने जो जांबाजी दिखाई, उसी ने जहर को महिला के दिल तक पहुंचने से रोक दिया।
नीमच में 20 और इंजेक्शन; कुल 30 डोज से मिली नई जिंदगी
नीमच जिला अस्पताल पहुंचते ही वहां की मेडिकल टीम ने गोविंद सिंह सांडा की मुस्तैदी को देखते हुए तुरंत मरीज को आईसीयू में शिफ्ट किया।
वहां महिला को तत्काल 20 और एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन दिए गए। कुल 30 एंटी-वेनम इंजेक्शनों के इस भारी और रिकॉर्ड तोड़ डोज के बाद आखिरकार जहर पूरी तरह बेअसर हो गया। डॉक्टरों ने बगदी बाई को पूरी तरह सुरक्षित और खतरे से बाहर घोषित कर दिया है। महिला अब सामान्य रूप से बातचीत कर रही है। *पूरे अंचल में सांडा और डॉक्टरों की जय-जयकार*, अंधविश्वास पर करारा तमाचाएक तरफ डॉक्टरों की भगवान जैसी तत्परता और दूसरी तरफ कांग्रेस नेता गोविंद सिंह सांडा की अनुकरणीय मानवीय पहल की गूंज अब पूरे नीमच जिले और प्रादेशिक स्तर पर सुनाई दे रही है। अंचल के नागरिकों का कहना है कि यदि गोविंद सिंह सांडा जैसा संवेदनशील नेतृत्व समय पर अपनी गाड़ी और हिम्मत नहीं दिखाता, तो आज एक गरीब आदिवासी परिवार बिखर जाता।
झाड़-फूंक नहीं, अस्पताल ही एकमात्र रास्ता
इस चमत्कारिक घटना ने ग्रामीण इलाकों के लिए एक बहुत बड़ा सबक दिया है।
कांग्रेस नेता गोविंद सिंह सांडा और चिकित्सा विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से अंचलवासियों से अपील की है कि सर्पदंश (सांप काटने) की स्थिति में झाड़-फूंक, तांत्रिकों या जड़ी-बूटियों जैसे जानलेवा अंधविश्वासों में समय बिल्कुल न गंवाएं।
सांप के जहर का एकमात्र तोड़ ‘एंटी-स्नेक वेनम’ ही है, जो केवल सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। सही समय पर अस्पताल पहुंचना ही जिंदगी बचाने का सर्वश्रेष्ठ और एकमात्र विकल्प है।


