धर्म संस्कृतिमंदसौरमध्यप्रदेश

आठ मुखों में विराजमान भगवान शिव का अद्भुत स्वरूप, पशुपतिनाथ महादेव को बांधी रक्षा सूत्र की राखी

शिवना नदी के तट पर विराजित 4.6 टन वजनी अष्टमुखी शिवलिंग में दिखाई देते हैं भगवान शिव के आठ स्वरूप
(राधेश्याम मारू)
मंदसौर। शिवना नदी के पावन तट पर विराजमान श्री अष्टमुखी पशुपतिनाथ महादेव की नगरी मंदसौर में रक्षा बंधन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर श्री पशुपतिनाथ मंदिर में भगवान पशुपतिनाथ महादेव को विधि-विधान एवं श्रद्धाभाव के साथ रक्षा सूत्र की राखी बांधी गई। भगवान शिव को राखी अर्पित कर श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और समस्त जनमानस की सुख-समृद्धि, सुरक्षा एवं मंगल की कामना की। मंदसौर का श्री अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि अपनी अनूठी प्रतिमा के कारण देशभर में विशेष पहचान रखता है। मंदिर में विराजित विशाल अष्टमुखी शिवलिंग भगवान शिव के बहुआयामी स्वरूप का अद्भुत दर्शन कराता है। मंदसौर की पहचान भगवान पशुपतिनाथ की नगरी के रूप में भी की जाती है। अष्टमुखी शिवलिंग यहां की धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। शिव का संदेश यही है-शिव एक हैं, स्वरूप अनेक हैं। अष्टमुखी पशुपतिनाथ के आठ मुख भगवान शिव की शक्ति, ज्ञान, सृजन, संरक्षण और परिवर्तन के विविध आयामों का संदेश देते हैं। नमः शिवाय। हर हर महादेव।
लगभग 4.6 टन वजनी है विशाल शिवलिंग
श्री पशुपतिनाथ मंदिर में स्थापित विशाल अष्टमुखी शिवलिंग का वजन लगभग 4.6 टन यानी 46 क्विंटल या 4600 किलोग्राम बताया जाता है। इसकी ऊंचाई लगभग 3.5 मीटर (11.25 फीट) है। शिवलिंग पर भगवान शिव के आठ मुख दो स्तरों में अंकित हैं-ऊपरी भाग में चार और निचले भाग में चार। इन आठ मुखों में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों का दर्शन होता है, जो शिव की विराट सत्ता और उनके विविध आध्यात्मिक भावों को अभिव्यक्त करते हैं।
आठ मुखों में भगवान शिव के अलग-अलग स्वरूप
पर्यटन विभाग के आधिकारिक विवरण के अनुसार अष्टमुखी पशुपतिनाथ शिवलिंग के आठ मुख भाव, पशुपति, महादेव, ईशान, रुद्र, शर्व, उग्र और अशनी स्वरूपों को दर्शाते हैं। भाव सृष्टि, जीवन और अस्तित्व के भाव का प्रतीक माना जाता है। पशुपति समस्त जीव-जगत के स्वामी एवं रक्षक के रूप में भगवान शिव की महिमा को दर्शाता है। महादेव शिव की विराट एवं सर्वाेच्च सत्ता का प्रतीक है। ईशान ज्ञान, चेतना और आध्यात्मिक शक्ति से जुड़ा स्वरूप माना जाता है। रुद्र अज्ञान, अहंकार और नकारात्मकता के विनाश तथा परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक है। शर्व शिव की सर्वव्यापक सत्ता का भाव प्रकट करता है। उग्र भगवान शिव की प्रचंड शक्ति, साहस और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। अशनी शिव की शक्तिशाली एवं परिवर्तनकारी प्रकृति की ओर संकेत करता है। आठों स्वरूप मिलकर भगवान शिव के विराट और बहुआयामी स्वरूप का दर्शन कराते हैं।
हर मुख पर तीसरा नेत्र
अष्टमुखी पशुपतिनाथ की प्रतिमा की एक खास विशेषता इसके मुखों पर दिखाई देने वाला तीसरा नेत्र भी है। हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान शिव का तीसरा नेत्र दिव्य दृष्टि, ज्ञान, चेतना और सत्य का प्रतीक माना जाता है।
शिवना करती है पशुपतिनाथ का प्राकृतिक जलाभिषेक
भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर और शिवना नदी का संबंध भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का विषय है। स्थानीय मान्यता के अनुसार वर्षा ऋतु में जब शिवना नदी का जलस्तर बढ़ता है और नदी का पानी भगवान पशुपतिनाथ तक पहुंचता है, तो श्रद्धालु इसे प्रकृति द्वारा भगवान शिव के प्राकृतिक जलाभिषेक के रूप में देखते हैं। मानसून के दौरान यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
मंदिर परिसर में अन्य देवालय भी
श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में भगवान हनुमान तथा श्री जानकीनाथ को समर्पित मंदिर भी स्थित हैं। शिवना नदी के किनारे स्थित यह धार्मिक परिसर मंदसौर की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रक्षा बंधन पर उमड़ी श्रद्धा
रक्षा बंधन के अवसर पर भगवान श्री पशुपतिनाथ को राखी बांधने के साथ ही श्रद्धालुओं ने महादेव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। भक्तों ने भगवान शिव से अपने परिवार एवं समाज की रक्षा, सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। संकलनकर्ता-लेखक, राधेश्याम मारू पत्रकार होकर सामाजिक कार्यकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}