भोपालमध्यप्रदेश

MP में 3.5 लाख स्वयंसेवी संस्थाओं पर ऑनलाइन शिकंजा, ई-साइन और ऑडिट अनिवार्य

MP में 3.5 लाख स्वयंसेवी संस्थाओं पर ऑनलाइन शिकंजा, ई-साइन और ऑडिट अनिवार्य

मध्य प्रदेश में केवल कागजों पर चल रहे फर्जी एनजीओ (NGO), ट्रस्ट, शिक्षण समितियों और सोसायटियों पर अब प्रशासन ने शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली है। प्रदेश भर में संचालित करीब 3.5 लाख गैर-सरकारी और सामाजिक संस्थाओं के कामकाज, चुनाव और खर्च की निगरानी अब पूरी तरह से ऑनलाइन की जाएगी। रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटीज ने इन संस्थाओं के लिए अपनी वार्षिक जानकारी जमा करने की व्यवस्था को डिजिटल कर दिया है। इस बड़े कदम से बिना ऑडिट और फर्जी तरीके से चल रही संस्थाओं की पहचान करना आसान हो जाएगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

ई-साइन हुआ अनिवार्य, बिना मर्जी कोई नहीं बनेगा सदस्य

इस नई व्यवस्था (धारा-27) के तहत सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ई-साइन (इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर) को लेकर किया गया है। अब संस्था की साधारण सभा की बैठक के 45 दिनों के भीतर नई कार्यकारिणी की सूची जमा करना अनिवार्य है। इसके लिए संस्था के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों का ई-प्रमाणीकरण (ई-साइन) जरूरी होगा। जब तक सभी का सत्यापन नहीं हो जाता, आवेदन जमा नहीं माना जाएगा। इस नियम से अब किसी भी व्यक्ति को उसकी जानकारी या सहमति के बिना चुपचाप संस्था का सदस्य या पदाधिकारी नहीं बनाया जा सकेगा। समय पर आवेदन जमा करने पर 1,000 रुपये और देरी होने पर 2,000 रुपये शुल्क देना होगा।

एक लाख से अधिक के लेन-देन पर सीए का यूडीआईएन (UDIN) जरूरी

वित्तीय मामलों (धारा-28) में पारदर्शिता लाने के लिए नियमों को और सख्त किया गया है। संस्थाओं को हर साल 30 अप्रैल से 90 दिनों के भीतर अपनी वार्षिक बैलेंस शीट और आय-व्यय का पूरा ब्यौरा पोर्टल पर देना होगा।

यदि संस्था का सालाना लेन-देन एक लाख रुपये से अधिक का है, तो चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) का यूडीआईएन (UDIN) नंबर दर्ज करना और सीए की ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, इसके लिए कोषाध्यक्ष का ई-साइन और अध्यक्ष या सचिव में से किसी एक द्वारा सत्यापन करना भी आवश्यक होगा।

ऑनलाइन सुधरेंगी आपत्तियां, बाबुओं और एजेंटों से मिलेगी मुक्ति

पूरी प्रक्रिया के ऑनलाइन होने से संस्थाओं को बड़ी राहत भी मिली है। यदि विभाग की तरफ से दस्तावेजों में कोई त्रुटि या आपत्ति निकाली जाती है, तो संस्था के लोग उसे सीधे पोर्टल पर देखकर ऑनलाइन ही सुधार कर सकेंगे।

आवेदन प्रक्रिया पूरी होते ही तुरंत एक वैध कंप्यूटर जनरेटेड पावती (रिसिप्ट) मिल जाएगी। इस पारदर्शी प्रणाली के कारण अब किसी भी काम के लिए एजेंटों या दफ्तरों के बाबुओं पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

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