समाचार मध्यप्रदेश मंदसौर 29 अगस्त 2026 शनिवार

महाकाल मंदिर से नीमच सोमेश्वर महादेव तक डाक कावड़ लाने वाले यदुवीर सेना का कृष्णाज ग्रुप ने किया अभिनंदन

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मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत शिविर 29 अगस्त को
मंदसौर 28 अगस्त 2026 / मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत जनपद पंचायत मंदसौर में 29 अगस्त शनिवार को शिविर आयोजित किया जाकर जन समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत जन संवाद तथा उद्यम संवाद शिविर मंदसौर के समीपस्थ ग्राम भूखी में आयोजित किया जाएगा द्वितीय सत्र में आयोजित होने वाले शिविर के पूर्व प्रथम सत्र में प्रातः अधिकारी गण मंदसौर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्र का भ्रमण करके जन समस्याओं जन शिकायतों का निराकरण करेंगे।
अधिकारियों द्वारा मंदसौर तथा आसपास के जिन ग्रामीण क्षेत्र का भ्रमण किया जाएगा उनमें रेवासदेवड़ा, नौगांवा, भूखी, हैदरवास, दाऊदखेडी, गुजरदा, भरड़ावद, अघोरया, सेजपुरिया, भालोट, आधारीनिरधार, खिलचीपुरा, ढिकोला, जग्गाखेड़, सिंदपन, माल्याखेडी, साबाखेड़ा, गुराडियादेदा , धारियाखेडी, रलायता, मुल्तानपुरा, लालघाटी, बोहराखेडी, जमालपुरा, कोचवी, गल्याखेडी, नगर पालिका परिषद, मंदसौर के वाड क्रमांक 1 से 20 क्षेत्र का भ्रमण करके नागरिकों ग्रामीणों की समस्याओं शिकायतों का निवारण निराकरण किया जाएगा शासकीय योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।
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5 दिवसीय बैंकिंग की मांग एवं पीएलआई में हेराफेरी के खिलाफ प्रदर्शन
मंदसौर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के घटकों द्वारा भारत सरकार की 5 दिन का बैंकिग लागू करने एवं सरकार की एक तरफा और भेदभावपूर्ण पीएलआई योजना के खिलाफ तथा लंबित मांगों के समाधान हेतु आज भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के सामने प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में सभी राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मी शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान बताया कि मांगों का निराकरण नहीं होने पर 11 सितम्ब को अखिल भारतीय हड़ताल, 28, 29 व 30 सितम्बर को 3 दिवसीय हड़ताल तथा 26 अक्टूबर से अनिश्चित कालीन हड़ताल का आव्हान किया गया है।
सभा को कामरेड महेन्द्रसिंह राठौर, रमेशचन्द्र जैन, सुरेन्द्र संघवी, गजेन्द्र तिवारी ने संबाधित किया। आभार जिनेन्द्र राठौर ने माना।
प्रदर्शन में नितिन खटाना, पूनम रावल, विरेन्द्र कुमार भावसर, भवानी मीणा, रवि गेहलोत, त्रिलोकसिंह शक्तावत, नरेन्द्र पायण्डिया, राकेश शर्मा, मोहित राठौर, प्रज्ञा जैन, मंगेश राठौर, रोशन सैनी, दीपक परमार सहित कई बैंक कर्मी शामिल हुए।
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रैपिडो चालकों के लिए ड्रेस कोड की मांग तेज, महिला सुरक्षा और पहचान का बना मुद्दा
मंदसौर। शहर में बढ़ती बाइक टैक्सी सेवाओं के बीच रैपिडो चालकों के लिए अनिवार्य ड्रेस कोड लागू करने की मांग उठने लगी है। नागरिकों का कहना है कि वर्तमान में कई चालक बिना किसी निर्धारित यूनिफॉर्म या पहचान के सेवा दे रहे हैं, जिससे यात्रियों और आम लोगों के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार जब कोई बाइक चालक युवतियों या महिलाओं को उनके घर तक छोड़ने पहुंचता है तो आसपास के लोगों को यह पता नहीं चल पाता कि वह बाइक टैक्सी चालक है या कोई परिचित व्यक्ति। ऐसी स्थिति में कई बार अनावश्यक चर्चाएं और गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं।
नागरिकों का यह भी कहना है कि निर्धारित यूनिफॉर्म और पहचान पत्र नहीं होने से कुछ असामाजिक तत्व बाइक टैक्सी सेवा का नाम लेकर गलत फायदा उठाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे मामलों में वास्तविक और फर्जी चालक के बीच अंतर कर पाना भी कठिन हो जाता है।
लोगों का मानना है कि यदि सभी रैपिडो चालकों के लिए कंपनी की ओर से यूनिफॉर्म, जैकेट एवं फोटोयुक्त पहचान पत्र अनिवार्य किए जाएं तो यात्रियों, विशेषकर महिला यात्रियों, में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। साथ ही किसी शिकायत, दुर्घटना या विवाद की स्थिति में चालक की पहचान करना भी आसान रहेगा।
सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने संबंधित कंपनियों एवं प्रशासन से मांग की है कि बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए स्पष्ट ड्रेस कोड और पहचान संबंधी नियम बनाए जाएं, ताकि सेवा की विश्वसनीयता बढ़े और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर लिया संरक्षण का संकल्प
पी.एम. कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस मंदसौर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आयोजित हुआ कार्यक्रममंदसौर। रक्षाबंधन पर्व को सामाजिक रिश्तों से प्रकृति तक विस्तार देने तथा जल, प्रकृति एवं पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मंदसौर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा शुक्रवार को ‘पेड़ को राखी–प्रकृति से भाईचारा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों ने महाविद्यालय परिसर में पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया।
सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, मध्यप्रदेश शासन द्वारा रक्षाबंधन पर्व 28 अगस्त 2026 के अवसर पर सामाजिक रिश्तों को प्रकृति से जोड़ते हुए जल, प्रकृति एवं पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लेने तथा विभिन्न वर्गों को इस अभियान से जोड़ने के लिए ‘एक राखी–एक संकल्प’, ‘रक्षासूत्र–एक राखी–एक रिश्ता’ एवं ‘पेड़ को राखी–प्रकृति से भाईचारा’ जैसी विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस अवसर पर एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा 15 फूलदार चांदनी के पौधों का रोपण भी किया गया। स्वयंसेवकों ने पौधों की देखभाल एवं उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि जिस प्रकार भाई-बहन के रिश्ते में रक्षा का संकल्प महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार प्रकृति और वृक्षों की रक्षा करना भी हम सभी का नैतिक दायित्व है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जे. एस. दुबे ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। रक्षाबंधन जैसे पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ना विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की दिशा में एक सार्थक पहल है। उन्होंने विद्यार्थियों से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।
इतिहास विभागाध्यक्ष वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. ऊषा अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव परिवार का अभिन्न अंग माना गया है। पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधना प्रकृति के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और संरक्षण की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधे की जिम्मेदारी लेकर उसका संरक्षण करे, तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।
कार्यक्रम में जिला संगठक एवं कार्यक्रम अधिकारी, एनएसएस डॉ. अनिल कुमार आर्य ने स्वयंसेवकों को पर्यावरण संरक्षण एवं पौधों की नियमित देखभाल के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि एनएसएस का उद्देश्य युवाओं में सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करना है तथा प्रकृति संरक्षण इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य है।
कार्यक्रम में बॉटनी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेरणा मित्रा, क्रीड़ाधिकारी श्री राजू कुमार, पर्यावरण प्रभारी श्री अशोक धनोतिया, लेब टेक्नीशियन श्री दिनेश पंवार सहित एनएसएस स्वयंसेवकों ने सहभागिता की।
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आक्रोश के बीच मध्य प्रदेश सरकार का ‘डैमेज कंट्रोल’, क्या सीधे संवाद से शांत होगी छात्र-किसान नाराजगी?
विशेष ब्यूरो, भोपाल: देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे छात्र आंदोलनों और राज्य के भीतर हालिया किसान प्रदर्शनों के बाद अब मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। सरकार के खिलाफ पनप रहे असंतोष को थामने और व्यवस्था में प्रशासनिक पारदर्शिता का भरोसा जगाने के लिए मुख्यमंत्री ने अब बंद कमरों के बजाय सीधे जनता के बीच जाने की एक बड़ी रणनीति तैयार की है, जिसके तहत पूरे प्रदेश में ‘युवा-कृषि संवाद’ की श्रृंखला को संभाग स्तर से बढ़ाकर हर जिले तक विस्तारित किया जा रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सरकार युवाओं की समस्याओं का कोई सतही समाधान नहीं बल्कि एक ठोस नीतिगत ढांचा तैयार करना चाहती है और इसीलिए नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राज्य के युवाओं को स्कूली, कॉलेज, संगठित, असंगठित और पूरी तरह से वंचित जैसे पांच विशिष्ट वर्गों में विभाजित कर उनकी जरूरतों के हिसाब से सीधे इनपुट लिए जा रहे हैं। चालू वर्ष को ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के रूप में मना रही सरकार का प्राथमिक फोकस इस समय उन ग्रामीण युवाओं को रोकना है जो बुनियादी संसाधनों और रोजगार के अभाव में तेजी से शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं ताकि व्यवस्था में बिचौलियों और संवादहीनता को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
स्वतंत्र नजरिए से देखें तो जिला स्तर पर जनता से सीधे जुड़ने का यह प्रयास निश्चित रूप से पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक बेहद सकारात्मक और सुरक्षित कदम है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संवाद के बाद युवाओं को केवल आश्वासन मिलता है या फिर उनकी जमीनी शिकायतों, समयबद्ध रोजगार और किसानों को उनकी फसलों के उचित मूल्य की समस्याओं पर तत्काल और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
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