मंदसौर जिला

गृहणियाँ वास्तव में राष्ट्र की निर्माता हैं– सर्वोच्च न्यायालय

गृहणियाँ वास्तव में राष्ट्र की निर्माता हैं– सर्वोच्च न्यायालय

गरोठ/मंदसौर- मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, न्यायाधीश श्री पुंजिया बारिया द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए सड़क दुर्घटना में मृत गृहणी श्रीमती फातिमा बी. के आश्रितों को ₹41,76,000.00 (इकतालीस लाख छिहत्तर हजार रुपये) का प्रतिकर तथा दावा प्रस्तुति दिनांक 24 जुलाई 2025 से भुगतान की तिथि तक 6% वार्षिक ब्याज सहित प्रदान करने का अवार्ड पारित किया गया।

उल्लेखनीय है कि दुर्घटना दिनांक 09 जून 2025 को फातिमा बी., निवासी गांधी नगर, शामगढ़, अपने भांजे साजिद खान के साथ मोटरसाइकिल से गरोठ से शामगढ़ लौट रही थीं। इसी दौरान ढाबला गुर्जर के समीप गरोठ–उज्जैन फोरलेन पर एक मारुति ऑल्टो कार के चालक द्वारा तेज एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे फातिमा बी. की मृत्यु हो गई।

मृतका के पुत्र जाफर, सलमान एवं पुत्रियों द्वारा अपने अधिवक्ता पंकज कुमार वेद,  मंदसौर के माध्यम से मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, गरोठ के समक्ष क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया।

माननीय अधिकरण ने अपने निर्णय में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिशुपाल बनाम सुरजीत प्रकरण में प्रतिपादित सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि गृहणी का परिवार के प्रति योगदान अमूल्य है तथा उसका पूर्ण मौद्रिक मूल्यांकन संभव नहीं है। गृहणी परिवार के भोजन, वस्त्र, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, देखभाल एवं अन्य घरेलू दायित्वों का निर्वहन करती है। उसकी सेवाएँ भले ही प्रत्यक्ष रूप से आय अर्जित न करती हों, किंतु उनका आर्थिक महत्व किसी भी दृष्टि से कम नहीं है।

निर्णय में यह भी कहा गया कि गृहणी की प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष मासिक सेवाओं का मूल्य किसी भी स्थिति में न्यूनतम मजदूरी प्राप्त करने वाले श्रमिक से कम नहीं आँका जा सकता। *न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि “गृहणियाँ वास्तव में राष्ट्र की निर्माता हैं और उन्हें उसी रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।”*

इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर अधिकरण ने मृतका फातिमा बी. की घरेलू देखभाल सेवाओं की मासिक आय ₹30,000 निर्धारित की, उसमें 25% भविष्यगत वृद्धि (Future Prospects) जोड़ते हुए तथा अन्य प्रचलित मदों के अंतर्गत *कुल ₹41,76,000* का प्रतिकर प्रदान किया। साथ ही उक्त राशि पर दावा प्रस्तुति दिनांक 24 जुलाई 2025 से भुगतान की तिथि तक 6% वार्षिक ब्याज देने का आदेश वाहन की बीमा कंपनी के विरुद्ध पारित किया।

प्रकरण की पैरवी करने वाले अधिवक्ता पंकज कुमार वेद, मंदसौर ने बताया कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, गरोठ द्वारा पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने तथा मोटर वाहन अधिनियम के कल्याणकारी उद्देश्य को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में यह निर्णय उल्लेखनीय है। *दावा प्रकरण का 11 माह से भी कम अवधि में अंतिम निर्णय किया जाना त्वरित न्याय और महिलाओं के द्वारा घरेलू काम का मौद्रिक मूल्यांकन और उनके सम्मान का उत्कृष्ट उदाहरण है।*

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