
पति की मौत के बाद बेघर हुई वृद्ध महिला, सात बेटियों ने दी पिता को मुखाग्नि
किशनगढ़ ताल
ठाकुर शंभू सिंह तंवर
जिस बेटे से बुढ़ापे का सहारा मिलने की उम्मीद थी, उसी पर एक वृद्ध मां ने घर से बेदखल करने, प्रताड़ित करने और पिता के अंतिम संस्कार तक से दूरी बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्राम हीड़ी निवासी करीब 60 वर्षीय भंवर बाई ने नागदा थाना पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।
महिला ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि शासन की इंदिरा आवास योजना के तहत उन्हें रहने के लिए मकान मिला था, ताकि वृद्धावस्था में सुरक्षित जीवन यापन कर सकें। लेकिन उनके पुत्र मुकेश और पुत्रवधू पूजा राठौर ने कथित रूप से मकान पर कब्जा कर उन्हें घर से बाहर कर दिया।
#भंवर बाई ने बताया कि हम दोनों पति-पत्नी बेटी के ससुराल किशनगढ़ ताल यहां रहे थे
पति सागरराम लंबे समय से बीमार थे। इस दौरान बेटे और बहू ने उनकी देखभाल या इलाज में कोई सहयोग नहीं किया। इलाज के दौरान सागरराम का निधन हो गया, लेकिन आरोप है कि बेटे ने न तो पिता के अंतिम दर्शन किए और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुआ।
अंतिम संस्कार गांव किशनगढ़ ताल निवासी जमाई विक्रम लाल पिपलिया द्वारा किया गया
इस संवेदनहीन स्थिति में मजबूरन सागरराम की सात बेटियों ने आगे आकर पिता को मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाईं। गांव में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
महिला का आरोप है कि पति की मौत के बाद भी उन्हें सहारा देने के बजाय लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। गांव लौटने पर झूठे मामलों में फंसाने और आत्महत्या का आरोप लगाने जैसी धमकियां भी दी जा रही हैं। भय और असुरक्षा के कारण वह फिलहाल रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं।
वृद्ध महिला ने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर शासकीय आवास में उनका वैधानिक अधिकार दिलाने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। आवेदन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक उज्जैन, एसडीएम, तहसीलदार एवं नगर पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है।



