समाचार मध्यप्रदेश मंदसौर 29 मई 2026 शुक्रवार

/////////////////////////////////
पोलीटेक्निक महाविद्यालय में प्रवेश हेतु काउंसलिंग प्रारंभ
इंजीनियरिंग क्षेत्र में अपना केरियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थी 29 मई तक पंजीयन कराए
मंदसौर 28 मई 26 / शिवशंकर शर्मा शा. पोलीटेक्निक महाविद्यालय मंदसौर प्राचार्य द्वारा बताया गया कि कार्यालय अध्यक्ष काउंसलिंग समिति, आयुक्त, तकनीकी शिक्षा संचालनालय भोपाल द्वारा शासकीय पोलीटेक्निक महाविद्यालय मंदसौर में त्रिवर्षिय डिप्लोमा इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष में प्रवेश हेतु प्रथम चरण की कांउसलिंग आरंभ हो चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 29 मई 2026 है।
इंजीनियरिंग क्षेत्र में अपना केरियर बनाने के इच्छुक 10वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी अपना पंजीयन संस्था में उपस्थित होकर निःशुल्क करवा सकते है। इस महाविद्यालय में 04 ब्रांच कमशः कम्प्युटर साईंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग संचालित है। विद्यार्थी मनचाही ब्रांच में पंजीयन के लिए 10वीं पास अंकसूची, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, मूल निवासी प्रमाण पत्र, आधार कार्ड की फोटो कॉपी तथा अपना पासपोर्ट साईज का फोटो साथ लेकर आए।
संस्था में प्रवेश संबंधित जानकारी के लिए प्राचार्य डॉ. दिलीप कुमार शर्मा मो.नं. 9826747125 या प्रवेश शाखा प्रभारी श्री आकाश तिवारी मो.नं. 7987519842 और श्री पुलकित जोशी मो.नं. 9424033264 से संपर्क किया जा सकता है । संस्था में प्रवेशित पात्र विद्यार्थियों को शासन के नियमानुसार फीस में छुट और छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाता है।
========================
पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति वर्ष 2026-27 हेतु MPTAAS पोर्टल प्रारंभ
पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 31 मई तक आवेदन करें
मंदसौर 28 मई 26 / पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग सहायक संचालक द्वारा बताया गया कि वर्ष 2026-27 के लिए पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के नवीन एवं नवीनीकरण आवेदन हेतु MPTAAS पोर्टल प्रारंभ हो चुका है। पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति 2026-27 के लिए 31 मई तक आवेदन कर सकते हैं।
जिले के समस्त शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि उनकी संस्था में अध्ययनरत पात्र नवीनीकरण विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति आवेदन MPTAAS पोर्टल पर समय पर प्रस्तुत कराए जाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विद्यार्थियों को आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की कठिनाई न हो एवं सभी पात्र विद्यार्थियों को योजना का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सके।
===========
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रदर्शन के नए आयाम स्थापित किए
खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 1.87 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार किया
मंदसौर 28 मई 26/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने बीते 12 वर्षों में विकास और परिवर्तन की अभूतपूर्व यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई, जो अब तक की सर्वाधिक बिक्री है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी आज केवल एक पारंपरिक उत्पाद नहीं, बल्कि ‘नये भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की है।
केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े
नई दिल्ली के गांधी दर्शन, राजघाट स्थित कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े (Provisional Data) जारी करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में पिछले 12 वर्षों में बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पूर्व वर्षों की प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।
खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार
अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह सशक्त प्रदर्शन ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को गति प्रदान करने के साथ-साथ भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रभावी मार्गदर्शन, महात्मा गांधी की प्रेरणा तथा देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत करोड़ों कारीगरों की मेहनत को दिया। अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन जहां 26109 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब पांच गुना बढ़कर 380 प्रतिशत के उछाल के साथ 125296 करोड़ रुपये पहुंच गया। जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31154 करोड़ रुपये थी, वहीं करीब छह गुना बढ़कर 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ यह वित्त वर्ष 2025-26 में 187105 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो कि अब तक की सर्वाधिक बिक्री है।
खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि
खादी वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,974 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 628 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री द्वारा खादी के सतत प्रचार-प्रसार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार विस्तार में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री का नया रिकॉर्ड
ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 25,298 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है। इसी प्रकार बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,79,236 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ग्रामोद्योग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.99 करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है।
रोजगार सृजन के क्षेत्र में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि
रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों में संचयी रोजगार (Cumulative Employment) 1.30 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
पीएमईजीपी से स्वरोजगार एवं उद्यमिता को नई गति
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025 26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी संवितरित की गई है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत टूलकिट वितरण से कारीगरों को सशक्तिकरण
ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अभी तक 51,230 विद्युत चालित चाक, 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी-कालोनी, 2,674 ऑटोमैटिक एवं पैडल चालित अगरबत्ती निर्माण मशीन, 7,669 फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग एवं रिपेयरिंग टूलकिट, 836 पेपर प्लेट एवं दोना निर्माण मशीन, 7,571 एसी, मोबाइल, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर टूलकिट, 5,138 टर्नवुड, वेस्टवुड क्रॉफ्ट एवं लकड़ी के खिलौने बनाने की मशीन तथा 1,789 पामगुड़, तेल घानी एवं इमली प्रसंस्करण मशीनों का वितरण किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत 37,769 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। यदि पिछले चार वर्षों पर दृष्टि डालें तो वर्ष 2022-23 में 21,874, वित्त वर्ष 2023-24 में 29,540, वित्त वर्ष 2024-25 में 38,904 तथा वित्त वर्ष 2025-26 में 37,769 मशीनों एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। इस प्रकार ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अभी तक कुल 3,23,006
मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
केवीआईसी के प्रयासों से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी केवीआईसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल हैं, जो कुल का लगभग 59 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 28,180 महिला उद्यमियों द्वारा इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके माध्यम से 3,09,980 महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी इस क्षेत्र को महिला नेतृत्व आधारित आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बनाती है।
कारीगरों के पारिश्रमिक में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि
कारीगरों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जो वर्ष 2013-14 में 4 रुपये प्रति टैंक से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकारी आपूर्ति, प्रदर्शनी बिक्री और राष्ट्रीय ध्वज की मांग में वृद्धि
इसके साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी आपूर्ति बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग को दर्शाती है। इसी क्रम में खादी उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, जो बाजार विस्तार और उपभोक्ता जुड़ाव को सुदृढ़ करती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन-अभियानों के प्रभाव और खादी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी को रेखांकित करती है।
===============
बाल विवाह रोकथाम को लेकर मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला
ग्राम स्तर तक नियुक्त होंगे “बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी”
कानून के सख्त क्रियान्वयन की नई व्यवस्था लागू
मंदसौर 28 मई 26 / बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाने और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित अभियानों को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य शासन ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने पूर्व में जारी अधिसूचना को निरस्त करते हुए अब जिला से लेकर ग्राम स्तर तक विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को “बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी” के रूप में अधिसूचित किया है। यह निर्णय बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 16 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों के तहत लिया गया है। भारत सरकार के निर्देशों के अनुपालन में नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे बाल विवाह की रोकथाम, निगरानी और त्वरित कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
जिला कलेक्टर से पटवारी तक की जवाबदेही तय
इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब बाल विवाह रोकने के लिए एक बेहद मजबूत और त्रि-स्तरीय से भी बड़ा प्रशासनिक तंत्र काम करेगा। जिला स्तर पर इसकी कमान जिला कलेक्टर, अपर कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संभालेंगे, जबकि अनुभाग स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह तहसील स्तर पर तहसीलदार और सभी नायब तहसीलदारों को कानूनन सशक्त बनाया गया है। ब्लॉक स्तर पर मोर्चा संभालते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सेक्टर स्तर पर निगरानी रखने के लिए सभी राजस्व निरीक्षकों और महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जमीनी स्तर पर करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे पटवारी को और शहरी क्षेत्रों में नगर पालिक निगमों के जोनल अधिकारी, राजस्व अधिकारी, सहायक राजस्व अधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारियों को इस कानून को लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। इसके अलावा छोटे शहरों की नगर पालिका परिषदों और नगर परिषदों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, उप राजस्व निरीक्षक और मुख्य स्वच्छता निरीक्षकों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया। ग्राम स्तर तक प्रशासनिक जवाबदेही तय होने से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को बेहतर संरक्षण मिलेगा।
तुरंत एफआईआर और कार्रवाई
अब अगर कहीं से भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो वहां के पटवारी या सेक्टर पर्यवेक्षक कानूनी तौर पर सीधे दखल दे सकेगा और उसे रोकने के लिए अधिकृत होगा। अधिकारियों की इतनी बड़ी चेन होने से अब शादियों के सीजन में ‘चाइल्ड मैरिज’ पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सकेगी। यह कदम महिला एवं बाल विकास विभाग और राजस्व विभाग के आपसी समन्वय से बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा में एक गेम-चेंजर साबित होगी। राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
=============
“श्रम प्रहरी” बन अपंजीकृत संस्थानों की जानकारी देकर श्रमिक कल्याण में करें योगदान
टोल-फ्री श्रमिक हेल्पलाइन नंबर 1800-233-8888 पर दे सूचना
मंदसौर 28 मई 26 / श्रमिकों को सुरक्षित कार्यदशाएं और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से श्रम विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। आम नागरिक ‘श्रम प्रहरी’ के रूप में आगे आकर अपंजीकृत संस्थानों और निर्माण स्थलों की गोपनीय सूचना दे सकते हैं, जिससे श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ लक्षित वर्ग तक सुचारू रूप से पहुँचाया जा सके। श्रमिकों के हितों के संरक्षण और कार्यस्थल पर उनके स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए सभी संस्थानों एवं निर्माण स्थलों का श्रम विभाग के अंतर्गत पंजीयन होना अनिवार्य है, पंजीकरण न होने की स्थिति में श्रमिक सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
श्रम विभाग द्वारा कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए वर्तमान में संचालित व पंजीकृत निर्माण कार्यों, अति-खतरनाक और अन्य कारखानों की ऑनलाइन सूची विभाग के आधिकारिक पोर्टल labour.mp.gov.in पर सार्वजनिक कर दी गई है। आम नागरिक इस पोर्टल पर जाकर पंजीकृत संस्थानों की जांच कर सकते हैं और यदि कोई भी संस्थान या निर्माण स्थल अपंजीकृत पाया जाता है, तो वे ‘श्रम प्रहरी’ की भूमिका निभाते हुए इसकी सूचना टोल-फ्री श्रमिक हेल्पलाइन नंबर 1800-233-8888 पर दे सकते हैं। नागरिकों द्वारा प्राप्त प्रामाणिक सूचनाओं के आधार पर श्रम विभाग द्वारा संबंधित स्थलों का त्वरित परीक्षण कर आवश्यक कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पंजीकरण न कराने वाले नियोजकों को 2 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान
कारखाना अधिनियम-1948 यह प्रावधानित करता है कि ऐसा कोई भी परिसर, जहां 20 या अधिक श्रमिक विद्युत शक्ति के साथ अथवा बिना विद्युत शक्ति के विनिर्माण कार्य में नियोजित हैं, उस संस्थान को मुख्य कारखाना निरीक्षक से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्त विनियमन) अधिनियम-1996 के तहत नियोजक का यह दायित्व है कि वह किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व इसकी सूचना अनिवार्य रूप से श्रम विभाग को उपलब्ध कराए। संस्थानों का पंजीकरण न कराने वाले नियोजकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का भी कड़ा प्रावधान है, जिसके तहत कारखानों के मामले में अधिकतम 1 लाख रुपये का जुर्माना अथवा 2 वर्ष तक का कारावास या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। इसी प्रकार, निर्माण स्थलों का पंजीकरण नहीं कराए जाने पर 2 हजार रुपये का जुर्माना अथवा 3 माह तक का कारावास या दोनों की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग ने सभी नियोजकों को सचेत किया है कि वे किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए अपनी संस्था एवं निर्माण कार्य का पंजीकरण तत्काल सुनिश्चित करें।
==================
सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार 2025-26 के लिए 15 जून तक आवेदन आमंत्रित
विकासखंड स्तर पर 10 हजार रूपये एवं जिला स्तर पर 25 हजार रूपये का पुरस्कार
कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य व कृषि अभियांत्रिकी के कृषक कर सकेंगे आवेदन
मंदसौर 28 मई 26 / उप संचालक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा बताया गया कि सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन आत्मा परियोजना के तहत मूल्यांकन वर्ष 2025-26 की गतिविधियों के आधार पर कृषक पुरुस्कार (कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, कृषि अभियांत्रिकी) के प्रति विकासखंड 5 सर्वोत्तम कृषक पुरुस्कार जिनकी प्रति पुरुस्कार राशि 10 हजार रुपये एवं 10 जिला स्तरीय सर्वोतम कृषक पुरुस्कार जिसकी प्रति पुरुस्कार राशि 25 हजार रुपये दिये जाने के लक्ष्य प्राप्त हुये है।
इसके लिए कृषकों द्वारा खेती में अपनाई गई नई कृषि तकनीकी उपज एवं उत्पादकता के आधार पर कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मतस्यपालन, एवं कृषि अभियांत्रिकी संबंधित गतिविधियों के आधार पर इच्छुक कृषक अपने अपने आवेदन कार्यालय वरिष्ट कृषि विकास अधिकारी/बी.टी.एम./ए.टी.एम. विकासखंड मंदसौर, मल्हारगढ़, सीतामऊ,गरोठ,भानपुरा से प्राप्त कर आवेदन कर सकते है। सहयोगी विभागों के आवेदन सम्बंधित विभागों के कार्यालयों में जमा किये जा सकते है।
आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 तक निर्धारित की जाती है। निर्धारित प्रारूप में आवेदन की सम्पूर्ण प्रविष्टियाँ एवं आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर वरिष्ट कृषि विकास अधिकारी/बी.टी.एम./ए.टी.एम. विकासखंड मंदसौर, मल्हारगढ़, सीतामऊ, गरोठ, भानपुरा में जमा कर सकते है।
प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन निर्धारित प्रक्रिया एवं जिला स्तरीय मूल्यांकन समिति के द्वारा मूल्यांकन प्रक्रिया पूर्ण कर अंतिम चयन किया जावेगा। चयन में कलेक्टर सह अध्यक्ष आत्मा गवर्निंग बोर्ड जिला मंदसौर का निर्णय अंतिम होगा।
===========



