जमीनों के नामांतरण रुकें, 428 तहसीलों में अटके 1.87 लाख मामले

जमीनों के नामांतरण रुकें, 428 तहसीलों में अटके 1.87 लाख मामले
मध्य प्रदेश की 428 तहसीलों में करीब एक लाख 87 हजार नामांतरण के प्रकरण अटके हुए हैं, जिनका निराकरण किया जाना है। यह सभी अविवादित नामांतरण के मामले हैं, लेकिन एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार स्तर पर किसी न किसी कारणों से यह लंबित बने हुए हैं।
प्रदेश भर में लंबित हैं 1.87 लाख से अधिक अविवादित मामले
जानकारी के अनुसार प्रदेश के 55 जिलों में कुल 10 संभाग हैं, जिनमें 428 तहसीलें हैं। इनमें बंटवारा, सीमांकन और नामांतरण के अविवादित और विवादित प्रकरणों का निराकरण किया जाता है। इन तहसीलों में अब तक 35 लाख 60 हजार 455 नामांतरण के अविवादित प्रकरण रजिस्टर्ड हुए थे, जिनमें से 33 लाख 72 हजार 645 का निराकरण किया जा चुका है। जबकि एक लाख 87 हजार 800 प्रकरण अब भी लंबित बने हुए हैं, जिनका किसी न किसी कारण से निराकरण नहीं हो सका है।
डिजिटल होने के बावजूद तय समय-सीमा में नहीं हो रहा काम
प्रदेश में नामांतरण प्रक्रिया पूरी तरह हो चुकी है डिजिटल। मध्य प्रदेश में अब संपत्ति या जमीन का नामांतरण करवाने की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी है। अब रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है, इसके अलावा विभिन्न पोर्टल पर जाकर स्वयं, कियोस्क व लोकसेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन कर नामांतरण करवाया जा सकता है। इसके लिए अविवादित मामलों में 30 दिन के अंदर निराकरण करने का प्रावधान है।


