जहां एक ओर सारे एस्पिरेंट्स इसकी आखिरी तैयारी में लगे वहीं दूसरी ओर भोपाल की NEET एस्पिरेंट अंकिता दांगी मलबे में से अपना एडमिट कार्ड खोज रही थी

जहां एक ओर सारे एस्पिरेंट्स इसकी आखिरी तैयारी में लगे वहीं दूसरी ओर भोपाल की NEET एस्पिरेंट अंकिता दांगी मलबे में से अपना एडमिट कार्ड खोज रही थी
3 मई को देशभर में NEET का एग्जाम हुआ। इससे ठीक एक दिन पहले, जहां एक ओर सारे एस्पिरेंट्स इसकी आखिरी तैयारी में लगे थे, वहीं दूसरी ओर भोपाल की NEET एस्पिरेंट अंकिता दांगी मलबे में से अपना एडमिट कार्ड खोज रही थी
वही मलबा जो शनिवार सुबह तक उसका घर था। 17 साल की अंकिता दांगी ने सुबकते हुए कहा, ‘मैं ऐसी स्थिति में एग्जाम कैसे दूंगी? सब बिगाड़ दिया, हमारा घर-पढ़ाई और हमारा भविष्य। एक घर के साथ हमारी लाइफ खत्म कर दी।’ अंकिता दांगी भोपाल के मानस भवन से सटी आदिवासी बस्ती में परिवार के साथ रहती थीं। उनके परिवार में मां-पिता और बहनें हैं। परिवार के पास फिलहाल कमाने का कोई जरिया नहीं है। अंकिता जिस आदिवासी बस्ती में रहती थीं, वो करीब 70 साल पुरानी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ये बस्ती मानस भवन के परिसर में थी, जिसे मानस भवन प्रोजेक्ट के तहत जगह को खाली काराया जाना था। इसे हटाए जाने का सरकारी आदेश काफी पहले ही आ चुका था। शनिवार की सुबह जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने के लिए 27 परिवारों के घर पर बुलडोजर चलवा दिया। अंकिता ने बताया कि उन्हें शुक्रवार रात 10 बजे प्रशासन ने घर खाली करने को कहा था। अंकिता और बाकी आदिवासी परिवारों ने पूरी रात सड़क पर बिताई। इसके बाद शनिवार सुबह करीब 6 बजे उनके घर बुलडोजर चला दिया। पूरा घर पल भर में मलबे में बदल गया और उन मलबों के बीच दबे रह गए उनके सारे डॉक्यूमेंट्स, जिनमें अंकिता का NEET UG एडमिट कार्ड भी था।
प्रशासन के मुताबिक, यहां से 27 परिवारों को हटाकर भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने पक्के मकानों में शिफ्ट किया जा रहा है। ये 1BHK फ्लैट हैं। अंकिता के मुताबिक, उन्हें सामान निकालने तक का वक्त नहीं दिया गया। बड़ी मिन्नतों के बाद दोपहर में वो किसी तरह अपना NEET का एडमिट कार्ड निकाल पाईं। लेकिन तब भी उसके दिमाग में बस यही सवाल था कि इन हालातों में वो कल एग्जाम कैसे देंगी? अंकिता का परिवार में पहली डॉक्टर बनने का सपना भी चकनाचूर हो गया।
अंकिता बोलीं- ‘मेरे पास NEET एग्जाम के लिए न कपड़े बचे, न आईडी’
अंकिता ने एक इंटरव्यू में बताया, ‘अगर मैं रविवार को एग्जाम सेंटर तक पहुंच भी जाऊं, तब भी NEET के सख्त नियम मेरे लिए बड़ी परेशानी हैं। मेरे पास जो कपड़े बचे हैं, वो ड्रेस कोड के मुताबिक नहीं हैं और मेरे सारे डॉक्यूमेंट मलबे के नीचे दबे हुए हैं।’ NEET के नियमों के मुताबिक परीक्षार्थियों को हल्के रंग के, फुल स्लीव्स वाले बिना किसी डिजाइन या कढ़ाई के कपड़े पहनने होते हैं और साथ में असली पहचान पत्र लाना जरूरी होता है। ऐसे में अंकिता के लिए ये शर्तें पूरी कर पाना अब लगभग नामुमकिन था।



