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फार्मासिस्ट दिवस पर स्वास्थ्य का संकल्प और दवा से आगे मरीज की सुरक्षा तक फार्मासिस्ट का दायित्व- डॉ हृदयेश कुमार 

फार्मासिस्ट दिवस पर स्वास्थ्य का संकल्प और दवा से आगे मरीज की सुरक्षा तक फार्मासिस्ट का दायित्व- डॉ हृदयेश कुमार 

अंतरराष्ट्रीय ट्रस्ट अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक डॉ हृदयेश कुमार ने जाट भवन सैक्टर 3 बल्लभगढ़ फरीदाबाद में विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर, फार्मासिस्टों और रोगी को स्वस्थ रखने के लिए विशेष जनसेवा का संकल्प का उदघोष किया । समारोह में वक्ताओं ने फार्मासिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाइयों के निर्धारण में फार्मासिस्ट की अहमियत को बताया और सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को मानव जीवन की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

डॉ हृदयेश कुमार ने विश्व फार्मासिस्ट दिवस के मौके पर फार्मासिस्टों ने रोगी सेवा तथा जनसेवा का संकल्प लिया। समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में फार्मासिस्ट की अहम भूमिका होती है। फार्मासिस्ट के महत्व पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां दवाई वहीं फार्मासिस्ट। इस दौरान फार्मासिस्ट को मानव जीवन का रक्षक करार देते हुए उसके कार्यों की विस्तार पूर्वक चर्चा की गई। वक्ताओं ने उपस्थित फार्मासिस्टों से रोगी सेवा तथा मानव जीवन की रक्षा के लिए हर सम्भव प्रयास करने का आवाहन किया। इसके अलावा उपस्थित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को कार्य क्षेत्र में मानव जीवन की रक्षा के लिए आपस में कंधे से कंधा मिलाकर चलने की सलाह दी गई। दवा से आगे मरीज की सुरक्षा तक फार्मासिस्ट का बदलता दायित्व स्वास्थ्य सेवा की विशाल व्यवस्था में मरीज के उपचार का श्रेय अक्सर डॉक्टर के निदान और नर्स की देखभाल को दिया जाता है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में फार्मासिस्ट की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा मरीज तक सही रूप में पहुंचे और उसका सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग हो, यह सुनिश्चित करने में फार्मासिस्ट अहम कड़ी की भूमिका निभाता है। हर वर्ष 25 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व फार्मासिस्ट दिवस इस पेशे के योगदान और बदलती जिम्मेदारियों को समझने का अवसर देता है। फार्मासिस्ट की भूमिका अब केवल प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। दवा की गुणवत्ता, उचित भंडारण, सही खुराक, संभावित दुष्प्रभाव, दवाओं के बीच परस्पर प्रतिक्रिया और मरीज को दवा के सही इस्तेमाल की जानकारी देना भी उसके महत्वपूर्ण दायित्वों में शामिल है। बढ़ती जीवन शैली संबंधी बीमारियों, बुजुर्गों में एक साथ कई दवाओं के इस्तेमाल, एंटीबायोटिक प्रतिरोध और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार ने फार्मासिस्ट की जिम्मेदारियों को और व्यापक किया है। ऐसे में विश्व फार्मासिस्ट दिवस केवल इस पेशे के सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि सुरक्षित, जिम्मेदार और प्रभावी दवा-उपयोग के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर भी है।

विश्व फार्मासिस्ट दिवस का आयोजन इंटरनेशनल फार्मास्युटिकल फेडरेशन यानी एफआईपी की पहल से होता है। 25 सितंबर को यह दिवस मनाने का उद्देश्य फार्मासिस्टों के योगदान को सामने लाना और स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी भूमिका के प्रति लोगों को जागरूक करना है। फार्मेसी विज्ञान का दायरा दवाओं की खोज और निर्माण से लेकर उनके सुरक्षित इस्तेमाल तक फैला हुआ है। आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में दवाओं की संख्या और उनकी जटिलता बढ़ने के साथ यह जरूरी हो गया है कि मरीज को केवल दवा उपलब्ध न कराई जाए, बल्कि उसे दवा के सही इस्तेमाल की जानकारी भी मिले। इसी जरूरत ने फार्मासिस्ट को स्वास्थ्य सेवा की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाया है। डॉ छतर सिंह रावत ने बताया कि आम तौर पर मरीज डॉक्टर से सलाह लेने के बाद फार्मेसी से दवा प्राप्त करता है। इस प्रक्रिया में फार्मासिस्ट मरीज के संपर्क में आने वाला स्वास्थ्यकर्मी होता है। कई बार मरीज को डॉक्टर की सलाह या Prescription में लिखी दवा के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। ऐसे में फार्मासिस्ट सरल भाषा में बता सकता है कि दवा कब लेनी है, भोजन से पहले या बाद में लेनी है, कितनी मात्रा में लेनी है और किन सावधानियों का ध्यान रखना है। कुछ दवाओं को एक निश्चित तापमान पर रखना जरूरी होता है, जबकि कुछ दवाओं को प्रकाश या नमी से बचाना पड़ता है। इनके उचित भंडारण में भी फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी होती है। इसी तरह Expiry Date, दवा की गुणवत्ता और पैकेजिंग की जांच भी सुरक्षित दवा-व्यवस्था का हिस्सा है। इसलिए फार्मासिस्ट को दवा और मरीज के बीच केवल आपूर्ति की कड़ी मानना उसके वास्तविक योगदान को सीमित कर देना होगा। वह दवा के सुरक्षित इस्तेमाल और मरीज की समझ के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है। किसी भी उपचार व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य मरीज को नुकसान से बचाना है। गलत दवा, गलत खुराक, दवा को गलत तरीके से लेना या दो दवाओं के बीच प्रतिकूल प्रतिक्रिया कई बार गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। विशेष रूप से बुजुर्ग मरीज अक्सर एक साथ कई दवाएं लेते हैं। ऐसे मरीजों में Drug Interaction की संभावना अधिक हो सकती है। बच्चों के मामले में भी दवा की मात्रा उम्र और वजन के अनुसार निर्धारित करना महत्वपूर्ण होता है। फार्मासिस्ट दवा से जुड़ी ऐसी संभावित समस्याओं को पहचानने में मदद कर सकता है और आवश्यकता होने पर चिकित्सक का ध्यान उस ओर आकर्षित कर सकता है। इससे मरीज किसी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह ले सकता है। इस तरह फार्मासिस्ट उपचार की सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान देता है। स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी चुनौतियों में Self-medication यानी बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेना भी शामिल है। कई लोग पुराने Prescription के आधार पर दोबारा दवा लेना शुरू कर देते हैं या किसी परिचित के अनुभव के आधार पर दवा का इस्तेमाल करते हैं। यह आदत नुकसानदेह हो सकती है, क्योंकि एक ही तरह के लक्षण अलग-अलग बीमारियों के कारण हो सकते हैं। एंटीबायोटिक का अनावश्यक इस्तेमाल विशेष चिंता का विषय है। एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण में उपयोगी होते हैं और हर प्रकार के संक्रमण या बुखार में इनकी जरूरत नहीं होती। इनके गलत या जरूरत से अधिक इस्तेमाल से Antibiotic Resistance की समस्या बढ़ सकती है। इसका अर्थ है कि कुछ बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं और संक्रमण का इलाज कठिन हो सकता है। फार्मासिस्ट मरीजों को यह समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि दवा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही ली जाए और एंटीबायोटिक का इस्तेमाल अपनी इच्छा से शुरू या बंद न किया जाए। भारत जैसे विशाल देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हर क्षेत्र में समान नहीं है। महानगरों में विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक अस्पताल आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कई बार चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे क्षेत्रों में फार्मासिस्ट लोगों को दवाओं के सही इस्तेमाल, उपचार को पूरा करने, सामान्य स्वास्थ्य सावधानियों और चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता के बारे में जागरूक कर सकते हैं।

हालांकि, फार्मासिस्ट की भूमिका डॉक्टर का विकल्प बनना नहीं है। उनका योगदान स्वास्थ्य व्यवस्था की अलग-अलग कड़ियों को मजबूत करना है। यदि Community Pharmacy को उचित प्रशिक्षण, नियमन और स्वास्थ्य व्यवस्था से बेहतर तरीके से जोड़ा जाए, तो यह प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

अतः आप सभी से आग्रह है कि आप बिना किसी डॉ की सलाह से कोई भी दवा इस्तेमाल ना करें क्योंकि आप का स्वास्थ्य ही आप के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट सदैव आपके उज्जवल भविष्य और स्वास्थ्य सेवा के लिए सदैव आपके साथ है आओ मिलकर स्वस्थ भारत का निर्माण करें ।

इस मौके पर डॉ चमन भाटी, डॉ महेंद्र भारद्वाज, डॉ विवेक, सुबोध कुमार साह, शिव शंकर राय पंडित वेद प्रकाश पाराशर, आनंद कुमार, ओम प्रकाश गौड़ तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने रोगी सेवा तथा स्वस्थ सेवा का संकल्प लिया।

डा. एम पी सिंह की अध्यक्षता , संचालन में बहुत ही सुन्दर समारोह आयोजित किया इनके अलावा इनके सभी निवासी मौजूद रहे सभी लोगों ने इस कार्यक्रम की सराहना की ,लक्ष्मण सिंह परिहार , पुष्पेंद्र कुमार, विमलेश देवी, प्रमोद कुमार ने ने लोगों को जागरूक करने का भी संकल्प लिया।

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