पर्यूषण पर्व का समापन: ‘मिच्छामि दुक्कडं’ के घोष के साथ क्षमापना, गौ-सेवा और ज्ञानदान

पर्यूषण पर्व का समापन: ‘मिच्छामि दुक्कडं’ के घोष के साथ क्षमापना, गौ-सेवा और ज्ञानदान
सुवासरा।नगर के जैन उपाश्रय भवन में जैन श्वेतांबर समाज के आठ दिवसीय पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर बुधवार सुबह में सामूहिक क्षमा याचना कार्यक्रम का आयोजन हुआ। ‘मिच्छामि दुक्कडं’ के भावपूर्ण जयघोष के साथ सकल जैन समाज के लोगों ने एक-दूसरे से जाने- अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगी।समाज के वरिष्ठ प्रबुद्धजनों ने पर्वराज पर्यूषण और क्षमा याचना के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्षमा मांगना और देना आत्मा को निर्मल बनाने का सबसे बड़ा माध्यम है। आठ दिनों तक धर्म-आराधना और स्वाध्याय कराने पधारे चारों स्वाध्यायी बंधुओं का जैन श्वेतांबर श्री संघ ट्रस्ट मंडल द्वारा शॉल, श्रीफल व अभिनंदन पत्र भेंट कर भावभीना बहुमान किया गया।
पर्व की पूर्णता पर श्री संघ द्वारा श्री गोपाल कृष्ण गौशाला में गायों को हरा चारा और पौष्टिक आहार अर्पित कर जीवदया का संकल्प निभाया गया।सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए श्री संघ ने नगर के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में जरूरतमंद विद्यार्थियों को कॉपी-किताबें और स्टेशनरी जैसी ज्ञान सामग्री वितरित की।इस अवसर पर जैन श्री संघ ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।



