मोड़ ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ पं गिरजाशंकर जी चतुर्वेदी का शतायु में हुआ देवलोकगमन

समाजजनों ने कहा पं गिरजाशंकरजी ईमानदार और मेहनती होने के साथ मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे
सीतामऊ।ब्राह्मणोत्पत्तिमार्तण्ड’ के अनुसार उतरी गुजरात के पाटन जिला अंतर्गत मोढेरा नगर में माता मोढेश्वरी का ऐतिहासिक मंदिर है जहां पर ब्राह्मण परिवार निवास करते थे उन्हें मोड़ ब्राह्मण कहा जाता है। शर्मा, द्विवेदी, त्रिवेदी, चतुर्वेदी, कश्यप दवे त्रिपाठी जोशी भारद्वाज दिक्षित कौशिक गौत्रीय परिवार है ऐसी जनश्रुति है कि भगवान श्री राम ने रावण वध से ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति के लिए मोढेरा में ब्राह्मणों को बसाया और यज्ञ करवाया था। आक्रांताओं और जीविकोपार्जन के कारण मोढे़रा गुजरात से पलायन कर मध्यप्रदेश मालवांचल में बसे सीतामऊ में रियायत के समय भी की विद्वान पुरोहित ब्राह्मण परिवारों को ज्योतिष,धार्मिक कार्यों के लिए आमंत्रित किया गया था।तब से मोढ ब्राह्मण परिवार यहां कि संस्कृति का हिस्सा बन गये।
उन्हीं तेजस्वी कुशाग्र विवेकवान गरीब ब्राह्मण परिवार में स्वर्गीय पंडित श्री नंदलाल जी मोड़ चतुर्वेदी के यहां विक्रम संवत 1925 के लगभग छः पुत्र पुत्रीयों में सबसे जेष्ठ पुत्र श्री गिरजाशंकर मोड़ पुरुषोत्तम मोड़ (सुवासरा) एवं हरिवल्लभ मोड़ है। गिरजाशंकर मोड़ के पांच पुत्र महेश,स्व दिनेश, सज्जन (भूपेंद्र) मुकेश नीरज वहीं पुरषोत्तम मोड़ के दो पुत्रियां एक पुत्र हरिवल्लभ मोड़ के तीन पुत्रियों का परिवार है।शुरू से ही पुरा परिवार साहसी और मेहनती रहा है। खेती नाममात्र और गरीब परिवार होने से मेहनत से कभी दुर नहीं हटे और कांवड़ों द्वारा प्रतिदिनों के साथ आयोजनों में लोगों के घरों में पानी भर कर अपनी जीविका चलाते थे। बताया जाता है कि पंडित श्री गिरजाशंकर जी एक ऐसे शख्सियत थे कि अपने पुरे परिवार के भोजन करने के बाद केवल एक समय रात्रि में भोजन करते थे। पं. गिरजाशंकर जी का भगवान से असीम प्रेम स्नेह भी रहा यही कारण है कि वे अपनी मेहनत मजदूरी के साथ राजवाड़ा गढ़ में पुजारी के रुप में भगवान लक्ष्मीनारायण कि सेवा भाव निभाया।इसी दौरान आपने जांगड़ा पोरवाल समाज में एवं पोरवाल मांगलिक भवन कि व्यवस्था के लिए व्यवस्थापक कि जिम्मेदारी भी लगभग चार दशक तक निभाई। इस दौरान समाज के परिवारों से इतना लगाव रहा कि वें जब भी समय मिलता वें उनसे घर पर मिलने पहुंच जाते उनसे हालचाल जानते थे।
ऐसे मेहनती मिलनसारिता के धनी पंडित श्री गिरजाशंकर जी मोड़ चतुर्वेदी का 13 सितंबर 2026 रविवार को लगभग शतायु में देवलोकगमन हो गया। उनके इस दुखद खबर से ब्राह्मण, पोरवाल समाज सहित विभिन्न समाजों मिलने वालों में शोक कि लहर दौड़ पड़ी।
उनके स्वर्गवास पर समाज जनों ने अपनी श्रद्धांजलि में उनके जीवन को याद करते हुए कहा कि स्वर्गीय पंडित श्री गिरजाशंकर जी मोड़ ईमानदार और मेहनती होने के साथ मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने जीवन में धन नहीं मान सम्मान प्राप्त किया है।आज के समय में उनकी मेहनत और कार्यों में बराबरी करना असंभव है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पोरवाल समाज संरक्षक दिनेश सेठिया डॉ गोवर्धनलाल दानगढ़ मुकेश कारा अध्यक्ष कैलाश घाटिया काका वरिष्ठ उपाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण मांदलिया, कोषाध्यक्ष बगदीराम उदिया, रमेशचंद्र उदिया, नवीन द्विवेदी श्रीनिवास मोड़ रामबिलास मोड़ गोपालकृष्ण एडवोकेट मंदसौर, जगदीश मोड़ शामगढ़,ओदम्बर ब्राह्मण समाज अध्यक्ष नवीन विश्वास द्विवेदी, गोपाल मोड़, राजेश गिरोठिया निरज बड़ोदिया सुनील भार्गव, राधेश्याम घाटिया मांगीलाल चावड़ा, घनश्याम केरवा, प्रभुलाल चौधरी, रमेशचंद्र मालवीया, निर्मल फरक्या आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित कर भगवान से श्री चरणों में स्थान प्रदान करने कि कामना की।



