मंदसौर जिलासीतामऊ

भगवान की सच्ची भक्ति करो तो भगवान श्री बालाजी महाराज की तरह – पं. हर्ष वर्धन शर्मा

भगवान की सच्ची भक्ति करो तो भगवान श्री बालाजी महाराज की तरह – पं. हर्ष वर्धन शर्मा

सीतामऊ। भगवान श्री सांवलिया सेठ की असीम कृपा से श्री चिंताहरण बालाजी खेजड़िया धाम के पावन सानिध्य में समस्त भक्तों के द्वारा भव्य शिवमहापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है

शिवमहापुराण कथा के छठे दिवस में व्यास पीठ से विराजित पं. श्री हर्षवर्धन शर्मा उज्जैन वाले के द्वारा कहा गया कि किसने कहा भक्त को भगवान प्राप्त नहीं होते बस भक्त की भक्ति पूर्ण संकल्पित रूप से होना चाहिए एवं अपने अटूट विश्वास के साथ होना चाहिए जिस प्रकार भगवान बालाजी महाराज का जन्म ही भगवान श्री राम की भक्ति को प्राप्त करने के लिए हुआ है माता अंजनी के लाल अपने बाल स्वरूप से ही भगवान श्री राम की भक्ति को अपने हृदय में धीरे धीरे संजोने लगे भगवान श्री बालाजी महाराज भगवान शिव शंकर महादेव का रुद्र अवतार भी है भगवान बालाजी महाराज अपने मन में भगवान श्री राम की भक्ति को जागृत होने पर अपने पिता के राजमहल एवं राज्य को छोड़कर अपने आराध्य देव भगवान श्री राम की खोज में अपनी तपस्या को आगमन कर चुके भगवान बालाजी महाराज की सच्ची भक्ति की पुकार को स्वीकार करते हुए वन में ही भगवान श्री राम से बालाजी महाराज का मिलन होता है इसके बाद अपना पूर्ण संकल्प भगवान श्री राम की भक्ति को समर्पण करते हुए भगवान की सेवा को ही अपना प्रथम लक्ष्य माना इसी कारण भगवान श्री बालाजी महाराज को अजर अमर का वरदान प्राप्त हुआ है इस कलयुग में भी समस्त देवी देवताओं के आशीर्वाद से भगवान श्री राम के आशीर्वाद से कलयुग में भगवान बालाजी महाराज अपने भक्तों की रक्षा करते रहेंगे इसी का प्रमाण इस कलयुग में साक्षात महाकाल की नगरी उज्जैन में हुआ है वर्तमान में ही सड़क चोडीकरण के लिए श्री खड़े हनुमान जी की मूर्ति का स्थान परिवर्तन करने का प्रयास किया गया लेकिन भगवान बालाजी महाराज ने अंगद की वह शक्ति का प्रमाण दिया है कि कोई भगवान बालाजी महाराज की मूर्ति को नहीं हिला पाया सारी वैज्ञानिक मशीनरी भगवान बालाजी महाराज के आगे नतमस्तक हुई क्योंकि इस कलयुग में भक्तों की रक्षा की जिम्मेदारी भगवान श्री राम ने बालाजी महाराज को दी है इसी कारण भगवान बालाजी महाराज ने अपना स्वरूप भक्तों को दिखाया है इसी कारण कहा जाता है कि यदि भगवान की भक्ति करना हो तो सच्चे भक्त बालाजी महाराज की तरह यूँ तो लंकापति रावण भी भगवान शिव शंकर महादेव का सबसे बड़ा भक्त था वह भगवान शिव शंकर महादेव को अपनी घोर तपस्या से प्रसन्न कर वरदान प्राप्त कर चुका था लेकिन भगवान महादेव ने वरदान देते हुए कहा था कि यदि कर्महीन होकर मार्ग भटककर यदि कोई अनुचित कार्य किया जाएगा तो उसका अंत भी भगवान के हाथों ही होगा और अंत समय रावण के मार्ग भटकने के कारण क्रर्महीन होने पर भगवान श्री राम ने रावण के पाप अत्याचार के साम्राज्य का अंत किया है इसी कारण कहा जाता है कि भगवान शिव शंकर महादेव यदि भोले स्वरूप में वरदान देते है तो निश्चित इस कलयुग में मार्ग भटकने वाले पापी अत्याचारों का अंत भी भगवान शिव शंकर भोलेनाथ ही करते है इस कलयुग में यदि भोलेनाथ की कृपा को प्राप्त करना हो तो हर इंसान को सदमार्ग एवं भक्ति के मार्ग पर चलते हुए परोपकार के कार्य करना चाहिए और कभी भी गोवंश को परेशान ना करना चाहिए क्योंकि गोमाता के अंदर ही 33 करोड़ देवी देवताओं का वास है एवं नंदी महाराज तो स्वयं भगवान भोलेनाथ के प्रथम सेवक है यदि नंदी महाराज को इस कलयुग में कष्ट हुआ तो भगवान भोलेनाथ के रौद्र अवतार को भी देखना पड़ सकता है लेकिन इस कलयुग में भगवान भोलेनाथ की भक्ति करने वाले यदि भक्तों को भी किसी ने कष्ट पहुंचाने का प्रयास किया तो वह साक्षात् भगवान भोलेनाथ की निगाहों में दोषी ही माना जाएगा इसी कारण कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ का भोला स्वरूप तो सिर्फ अपने भक्तों के लिए है पाप अत्याचार के मार्ग पर चलने वालों के लिए नहीं।

शिव महापुराण कथा के छटे दिवस की आरती यजमान लक्ष्मी नारायण दशरथ राठौड़ एवं अतिथि के रूप के पधारे पंडित शिवनारायण जी शर्मा मंदसौर पंडित सत्यनारायण जी शर्मा मंदसौर पंडित श्री दशरथ भाई जी पंडित श्री प्रवीण शर्मा पंडित भानुप्रताप  शर्मा मंदसौर कुंवर अरविंद  राठौड़ मार्शल बना ठाकुर दशरथ सिंह राठौर ठाकुर किशोर सिंह राठौर ठाकुर मान सिंह परिहार आयुष परिहार सानिध्य शर्मा ऋषिका दीक्षित मयंक नेनवानी गुरुदत्त मेहता आशीष परदेसी राजा भैया मंदसौर समस्त अतिथियों के द्वारा एवं पंडाल में उपस्थित समस्त भक्तों के द्वारा आरती की गई एवं समस्त अतिथियों के द्वारा कथा व्यास पंडित श्री हर्षवर्धन शर्मा का सम्मान किया गया एवं कथाव्यास के द्वारा भी समस्त अतिथियों का सम्मान किया गया जानकारी पंडित मनीष शर्मा के द्वारा दी गई।

 

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