राशि जमा कराने के बाद भी किसानों की गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस ! किसान नेता ने लगाया उत्पीड़न का आरोप, पुलिस का कहना राशि जमा कराने की जानकारी नही
राशि जमा कराने के बाद भी किसानों की गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस ! किसान नेता ने लगाया उत्पीड़न का आरोप, पुलिस का कहना राशि जमा कराने की जानकारी नही
पिपलिया स्टेशन (जेपी तेलकार)। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र में किसानों के खिलाफ बिजली बिल एवं कृषि पंप कनेक्शन से जुड़े मामलों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। किसान नेता श्यामलाल जोकचन्द ने आरोप लगाया है कि किसानों से न्यायालय के माध्यम से राशि जमा कराने एवं जमानत मिलने के बावजूद पुलिस द्वारा दोबारा गिरफ्तारी के लिए वारंट लेकर उनके घर पहुंचना किसानों का मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक उत्पीड़न है। उन्होंने इसे अन्नदाता किसानों के सम्मान के खिलाफ बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। किसान नेता जोकचन्द ने बताया कि ताजा मामला ग्राम जलोदिया का है, जहां बुधवार 29 जुलाई की शाम पिपलियामंडी पुलिस चौकी की टीम किसान नंदराम पिता मगनीराम मेघवाल एवं रामप्रसाद पिता मोहनलाल मेघवाल को गिरफ्तार करने उनके घर पहुंची। पुलिस ने न्यायालय से जारी गिरफ्तारी वारंट का हवाला देते हुए दोनों किसानों की तलाश की। संयोगवश दोनों किसान उस समय घर पर मौजूद नहीं थे, अन्यथा पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के लिए ले जाती। ग्रामीणों के अनुसार राशि जमा कराने के बाद भी पुलिस के आने से गांव में काफी देर तक चर्चा का माहौल बना रहा तथा किसानों के परिजन भी भय और चिंता में आ गए। जोकचन्द ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है। इससे पहले 8 मई 2026 को भी दोनों किसानों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था तथा उनके हाथों में हथकड़ी लगाई थी। विरोध के बाद हथकड़ियां खोल दी थी। बाद में किसानों को न्यायालय में पेश किया गया था। अगले दिन 9 मई 2026 को आयोजित न्यायालय द्वारा आयोजित लोक अदालत में दोनों किसानों ने कृषि पंप एवं कुएं के बिजली कनेक्शन से संबंधित प्रकरण में अलग-अलग 12,430 रुपये की राशि जमा कराई थी। इसके बाद अधिवक्ता के माध्यम से उनकी जमानत कराई गई और न्यायालय से उन्हें विधिवत रिहा कर दिया गया। उस समय पुलिस भी न्यायालय में मौजूद थी तथा राशि जमा होने की पूरी प्रक्रिया न्यायालय के समक्ष संपन्न हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब संबंधित प्रकरण में राशि जमा हो चुकी थी और न्यायालय से जमानत भी मिल चुकी थी, तब उसी मामले में पुनः गिरफ्तारी वारंट के आधार पर पुलिस का किसानों के घर पहुंचना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि यदि विभागीय अभिलेख समय पर अद्यतन नहीं किए गए या न्यायालय को सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं अधिकारियों की बनती है, न कि किसानों की। किसान नेता जोकचन्द ने प्रदेश सरकार, विद्युत वितरण कंपनी एवं पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों के खिलाफ कथित रूप से फर्जी प्रकरण दर्ज कर उनसे भारी-भरकम राशि वसूली जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन मामलों का निराकरण हो चुका है, उन्हीं मामलों में दोबारा कार्रवाई की जा रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ सामाजिक अपमान और मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि रात के समय पुलिस द्वारा किसानों के घर पहुंचकर गिरफ्तारी का प्रयास करना ऐसा प्रतीत कराता है मानो कोई गंभीर अपराधी पकड़ा जा रहा हो, जबकि किसान केवल अपने खेतों में मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले अन्नदाता हैं। जोकचन्द ने कहा कि यदि किसानों द्वारा जमा की गई राशि के बाद भी वारंट जारी हो रहे हैं तो यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसानों का उत्पीड़न नहीं रुका तो किसान संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
चौकी प्रभारी ने कहा पुलिस को नही बिल जमा कराने की जानकारी:-
पिपलियामंडी पुलिस चौकी प्रभारी रितेश डामोर ने बताया कि किसानों द्वारा संबंधित राशि जमा कराए जाने की जानकारी पुलिस को नहीं थी। उन्होंने कहा कि न्यायालय से पूर्व में जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर पुलिस कार्रवाई के लिए गई थी। यदि संबंधित किसानों ने राशि जमा कर दी है तो उसकी रसीद प्रस्तुत करने पर उसे वारंट के साथ न्यायालय भेज दिया जाएगा, जिसके बाद न्यायालय के निर्देशानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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