अहंकार मनुष्य को परमात्मा से दूर करता है – संत श्री मनोरथराम जी

रामस्नेही पीठाधीश्वर संत श्री रामदयाल जी महाराज का भक्तों ने किया स्वागत, वंदन अभिनंदन

सीतामऊ।स्थानीय क्षेत्र में आयोजित हो रही भव्य श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव के छठे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास पूज्य गुरुदेव मनोरथ राम जी महाराज ने ज्ञान की वर्षा करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन का सार समझाया।अहंकार ईश्वर भक्ति में सबसे बड़ी बाधाकथा की शुरुआत करते हुए पूज्य गुरुदेव मनोरथ राम जी महाराज ने कहा कि अहंकार इस संसार में किसी का भी नहीं रहा है। अहंकार शरीर और आत्मा के बीच एक ऐसा पर्दा (दीवार) बना देता है, जो मनुष्य को कभी भी परमात्मा से मिलने नहीं देता। उन्होंने राजस्थान के महान संत दादू दास जी महाराज के जीवन प्रसंग की कथा सुनाते हुए भावपूर्ण शब्दों में कहा कि ईश्वर की प्राप्ति केवल और केवल सच्चे प्रेम से ही संभव है। प्रेम के बिना भक्ति अधूरी है।अंतराष्ट्रीय रामस्नेही पीठाधीश्वर संत श्री रामदयाल जी महाराज के पदार्पण छठे दिन की कथा में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 संत श्री रामदयाल जी महाराज का आगमन हुआ। उनके पंडाल में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि से उनका आत्मीय स्वागत किया। भक्तों ने श्रद्धाभाव से गुरुदेव की वंदना कर उनकी विशेष पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया।इस अवसर पर पूज्य संत श्री रामदयाल जी महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण श्रवण करने मात्र से मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। जीवन के सभी क्लेश और मानसिक संताप समाप्त हो जाते हैं तथा मनुष्य को जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि वे आज और कल (दो दिन) सीतामऊ प्रवास पर ही रहेंगे।महाआरती और प्रसादी वितरण कथा के दौरान बड़ी संख्या में मातृशक्ति (माताएं और बहनें) तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरा पंडाल ‘जय श्री कृष्ण’ और ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। कथा के विश्राम पर भगवान की दिव्य महाआरती उतारी गई, जिसके बाद सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसादी का वितरण किया गया।



