आध्यात्ममंदसौर जिलासीतामऊ

मन के अनुसार चलने वाले को हर कदम पर मिलता है दुख, ईश्वर में लगाएं ध्यान: -संत श्री

श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के आनंद, कंस वध की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

सीतामऊ। “मन के मते न चालिए, फिर चले तो यह फलक फलक पर रोए।” गुरुदेव ने समझाया कि मनुष्य को कभी भी अपने मन की वासनाओं और चंचल इच्छाओं के अधीन नहीं होना चाहिए। जो व्यक्ति केवल मन के कहे अनुसार चलता है, उसे जीवन के हर मोड़ पर कष्ट और पछतावा ही मिलता है। उक्त ज्ञानामृत संत श्री मनोरथराम जी महाराज ने पोरवाल मांगलिक भवन में गुप्ता परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में कही।

संत श्री ने कहा कि जीवन का वास्तविक कल्याण केवल ईश्वर की शरण में जाने और अपना ध्यान प्रभु भक्ति में लगाने से ही संभव है।

भगवान परशुराम अवतार का प्रसंग संत श्री ने कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान परशुराम के दिव्य अवतार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ गया, तब भगवान ने परशुराम रूप में अवतार लिया। उन्होंने पृथ्वी से अत्याचारी और अहंकारी क्षत्रियों का समूल नाश किया और संपूर्ण धरती को ब्राह्मणों को दान कर अधर्म पर धर्म की स्थापना की।कारागार में कृष्ण जन्म और दिव्य लीलाएं इसके पश्चात कथा में श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आया।

संत श्री ने आगे कहा कि मथुरा में वासुदेव जी और देवकी जी के विवाह के बाद कंस ने आकाशवाणी से भयभीत होकर दोनों को कारागार में डाल दिया था। जेल की सलाखों के पीछे देवकी की आठवीं संतान के रूप में साक्षात पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ। प्रभु के जन्म लेते ही योगमाया के प्रभाव से जेल के सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए और सारे बंधन स्वतः ही खुल गए। वासुदेव जी उफनती यमुना को पार कर बालकृष्ण को सुरक्षित नंदगांव छोड़ आए।

आगे की कथा में श्रीकृष्ण और बलराम द्वारा नंदगांव में की गई माखन चोरी, पूतना वध, कालिया नाग मर्दन और अंत में अत्याचारी राजा कंस के वध का सजीव चित्रण किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

कथा महोत्सव में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झुम उठे भक्त जन

कथा व्यास पीठ से संत श्री ने भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य (जन्म) कथा के दौरान पूरा पांडाल में भक्त झुम उठे और ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से पांडाल गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर संत श्री ने भगवान की अलौकिक बाल लीलाओं और कंस वध के प्रसंग का अत्यंत रसपूर्ण और दिव्य वर्णन किया।

मुख्य यजमान रमेशचंद्र डबकरा एवं गुप्ता डबकरा परिवार सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में मातृशक्ति नागरिकों ने कथा के ज्ञानामृत का लाभ प्राप्त किया।

कथा यजमान रमेशचंद्र डबकरा ने बताया कि कल की कथा निर्धारित समय से प्रारंभ होगी कथा के पुण्य अवसर दोपहर 03 बजे अतंराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा पीठाधीश संत श्री रामदयाल जी महाराज का पदार्पण होगा। सभी धर्म प्रेमी जनों से अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में पधार कर कथा श्रवण एवं संत दर्शन का लाभ प्राप्त करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}