सूर्यनगर में खुदाई के दौरान अत्यंत प्राचीन और कलात्मक पाषाण प्रतिमा प्राप्त हुई

सूर्यनगर में खुदाई के दौरान अत्यंत प्राचीन और कलात्मक पाषाण प्रतिमा प्राप्त हुई
दलौदा। गौरवशाली इतिहास और प्राचीन पुरातत्व संपदा को समेटे मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के सूर्यनगर (अफजलपुर) में एक बार फिर भूमि ने अपना प्राचीन वैभव उगला है। यहां नई आबादी क्षेत्र में श्री बद्रीलाल दांगी के खेत के पास खुदाई के दौरान अत्यंत प्राचीन और कलात्मक पाषाण प्रतिमा प्राप्त हुई है।विशेष बात यह है कि यह प्रतिमा ठीक उसी स्थान के पास मिली है, जहां पूर्व में एक ऐतिहासिक सूर्य प्रतिमा भी प्रकट हुई थी। एक ही क्षेत्र से अलग-अलग काल और संप्रदायों की प्राचीन मूर्तियों का मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र सदियों पहले सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से कितना समृद्ध रहा होगा।
प्रतिमा की मुख्य विशेषताएँ और जानकारी:- मूल प्रतिमा (जैन तीर्थंकर) केंद्र में पद्मासन मुद्रा में विराजमान शांत और सौम्य स्वरूप वाली यह प्रतिमा जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान की है। ध्यान मग्न मुद्रा और कानों की लंबी लौ (कर्णपाश) इसके तीर्थंकर होने की स्पष्ट पहचान हैं।
परिकर और त्रिमूर्ति संरचना:- मुख्य तीर्थंकर के दोनों ओर नीचे दो खड़े हुए चंवरधारी (यक्ष- यक्षिणी अथवा देव- देवियाँ) अंकित हैं, जो इसे कलात्मक रूप से त्रिमूर्ति स्वरूप प्रदान करते हैं।
ऊपरी भाग (धार्मिक शिल्प):- मुख्य प्रतिमा के ऊपर छत्र, हाथी और उनके ऊपर छोटे-छोटे खानों (परिकर) में अन्य लघु तीर्थंकरों की आकृतियाँ बहुत ही खूबसूरती से उकेरी गई हैं।
अनुमानित काल:- मंदसौर और मालवा का यह क्षेत्र परमार कालीन शिल्प कला के लिए प्रसिद्ध रहा है। प्रथम दृष्ट्या यह प्रतिमा लगभग 10वीं से 12वीं शताब्दी (करीब 1000 वर्ष पुरानी) की प्रतीत होती है।यह खोज पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। पुरातत्व विभाग (ASI) को इस स्थान की गहन जांच करनी चाहिए ताकि यहाँ छिपे इतिहास के और भी पन्ने सामने आ सकें।


