कृषि विज्ञान केंद्र में संतुलित उर्वरक उपयोग पर प्रशिक्षण, वैज्ञानिकों ने दी अहम सलाह

कृषि विज्ञान केंद्र में संतुलित उर्वरक उपयोग पर प्रशिक्षण, वैज्ञानिकों ने दी अहम सलाह
गोरखपुर संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के अंतर्गत महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, चौक माफी में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए संतुलित उर्वरक प्रयोग की जानकारी दी गई।मृदा वैज्ञानिक डॉ. संदीप प्रकाश उपाध्याय ने कहा कि रबी फसलों की कटाई के बाद खेतों से मिट्टी का नमूना लेकर उसकी जांच अवश्य करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि एक खेत से पांच अलग-अलग स्थानों से मिट्टी लेकर उसे मिलाकर आधा किलो नमूना तैयार करें और उसमें किसान का नाम, पता व खसरा नंबर लिखकर परीक्षण के लिए भेजें।उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण की संस्तुति के आधार पर ही नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक और सल्फर जैसे पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए यूरिया, डीएपी, म्यूरेट ऑफ पोटाश, जिंक सल्फेट आदि उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिए। डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फास्फेट और एनपीके मिश्रण को भी लाभकारी बताया गया।उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव ने जैव उर्वरकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एजेटोबैक्टर, राइजोबियम, ट्राइकोडर्मा और पीएसबी कल्चर के उपयोग से फसल उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।शस्य वैज्ञानिक डॉ. अवनीश कुमार सिंह ने किसानों को बिना मिट्टी जांच के उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने फसल अवशेष जलाने के बजाय उसके प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है।पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. विवेक प्रताप सिंह ने कहा कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित प्रयोग और हरी खाद का उपयोग करने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और बेहतर पैदावार मिलती है।कार्यक्रम में जितेंद्र कुमार सिंह, गौरव सिंह सहित तीन दर्जन से अधिक किसानों ने भाग लिया।


