नीमचमध्यप्रदेश

-भाजपा ने महिला आरक्षण को बनाया ‘राजनीतिक मुखौटा’, असली मकसद परिसीमन के जरिए सत्ता हथियाना: तरुण बाहेती

-भाजपा ने महिला आरक्षण को बनाया ‘राजनीतिक मुखौटा’, असली मकसद परिसीमन के जरिए सत्ता हथियाना: तरुण बाहेती
​नीमच। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने महिला आरक्षण पर केंद्र की भाजपा सरकार की नीयतों और उनकी सोची-समझी साजिशों पर कड़ा प्रहार करते कहा की देश में महिलाओ को चुनावों में आरक्षण देने का काम कांग्रेस 34 वर्ष पूर्व कर चुकी हैं । श्री बाहेती ने कहा कि देश की मातृशक्ति को यह समझना होगा कि भाजपा सरकार ने महिला आरक्षण बिल को केवल एक ‘राजनीतिक मुखौटे’ की तरह इस्तेमाल किया है, जबकि इसके पीछे परिसीमन के जरिए सत्ता हथियाने और चुनावी लाभ लेने की एक गहरी साजिश छिपी है।
​श्री बाहेती ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को अच्छी तरह पता था कि विपक्ष परिसीमन यानी सीटों के फेरबदल की उन शर्तों पर कभी सहमत नहीं होगा जो देश के कई राज्यों के साथ अन्याय करती हैं। इसके बावजूद, उन्होंने जानबूझकर महिला आरक्षण जैसे पवित्र और संवेदनशील मुद्दे को जनगणना और परिसीमन के पेचीदा जाल में उलझा दिया। भाजपा का असली मकसद महिलाओं को हक देना नहीं, बल्कि इस मुद्दे की आड़ में पश्चिम बंगाल सहित आगामी तमाम विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेना और जनता को गुमराह करना है। यह महिलाओं की भावनाओं के साथ किया गया एक भद्दा मजाक है, जहाँ वोट बटोरने के लिए आरक्षण को ऐसी शर्तों से बांध दिया गया है, जिनके कारण यह अधिकार आने वाले कई दशकों तक धरातल पर नहीं उतर सकेगा। बाहेती ने कहा की जब 2023 में ही संसद में महिला आरक्षण बिल पास हो चुका है उस समय भी कांग्रेस ने सबसे पहले इसका समर्थन किया था भाजपा की अगर नियत सही है तो वह वर्तमान में 543 सीटों में से ही 33 फीसदी दिया आरक्षण महिलाओं के लिए करें।
​कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए तरुण बाहेती ने तथ्यों के साथ जोर दिया कि कांग्रेस पार्टी ही महिलाओं की सच्ची हितैषी है। भारत में महिलाओं को वास्तव में सम्मान देने और उन्हें राजनीति की मुख्यधारा में लाने का काम केवल कांग्रेस ने ही किया है। यह कांग्रेस की ही दूरदर्शी सोच का परिणाम था कि देश को पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी, पहली महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल, पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार, पहली महिला मुख्यमंत्री श्रीमती सुचेता कृपलानी और पहली महिला सुप्रीम कोर्ट जज फातिमा बीवी मिलीं। इसके विपरीत, भाजपा और आरएसएस का ढांचा ऐसा है जहाँ शीर्ष नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी हमेशा शून्य के बराबर रही है, जो इनकी असली पितृसत्तात्मक मानसिकता को दर्शाता है।
​महिला आरक्षण के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए श्री बाहेती ने कहा कि इसकी असली नींव 1989 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने रखी थी, जब उन्होंने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का क्रांतिकारी बिल पेश किया था। उस समय विपक्ष में बैठी भाजपा ने राज्यसभा में इस बिल को गिराकर अपनी महिला विरोधी सोच का परिचय दिया था। तमाम अवरोधों के बावजूद 1993 में नरसिम्हा राव जी की कांग्रेस सरकार ने इसे कानून बनाया, जिसमें महिलाओं को 33% प्रतिशत आरक्षण मिला जिससे आज लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में नेतृत्व कर रही हैं। साथ ही, 2010 में सोनिया गांधी जी के कड़े प्रयासों से यह बिल राज्यसभा में पास हुआ था, जिसे भाजपा ने उस समय भी लोकसभा में अटकवाया था। महिलाओं को मिले 33% प्रतिशत आरक्षण को बाद में बढ़ा कर कई राज्यों ने 50% किया।
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श्री बाहेती ने तीखा सवाल करते हुए कहा कि यदि भाजपा की नीयत में रत्ती भर भी खोट नहीं होता, तो वे साल 2023 में बिल पास होने के तुरंत बाद इसे वर्तमान सीटों पर ही लागू करते। आज देश के 20 से अधिक राज्यों में भाजपा की सत्ता है, लेकिन वे किसी भी राज्य में इसे लागू करके अपनी सच्चाई साबित नहीं कर पा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा केवल ‘इवेंट मैनेजमेंट’ और ‘झूठे प्रचार’ के जरिए महिलाओं को गुमराह कर रही है। कांग्रेस पार्टी भाजपा की इस राजनीतिक साजिश का पुरजोर विरोध करती है और मांग करती है कि महिलाओं को जनगणना और परिसीमन के नाम पर दशकों तक इंतजार करवाने के बजाय, उनका वास्तविक अधिकार बिना किसी देरी के तत्काल दिया जाए।
​तरुण बाहेती अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी, नीमच

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