संस्कारों से ही सुधरेगा समाज, मनुष्य पर्याय में ही धर्म संभव- आर्यिका समर्थ श्री माताजी

संस्कारों से ही सुधरेगा समाज, मनुष्य पर्याय में ही धर्म संभव- आर्यिका समर्थ श्री माताजी
मंदसौर। नाकोड़ा नगर स्थित आचार्य सन्मति कुंज संत भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका समर्थ श्री माताजी ने समाज में बढ़ती कुरीतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संस्कारों के अभाव के कारण समाज पतन की ओर बढ़ रहा है। यदि हमें देव-शास्त्र-गुरु के चमत्कार और कृपा का पात्र बनना है, तो जीवन में शुचिता और धर्म का समावेश अनिवार्य है। माताजी ने जोर दिया कि अभिभावक बच्चों को बचपन से ही धार्मिक संस्कार दें। उन्हें नियमित मंदिर जाने और साधु-संतों के सानिध्य में रहने के लिए प्रेरित करें। बच्चों का विवाह समय पर और अपने ही समाज में करने का आह्वान किया गया, ताकि पारिवारिक और सामाजिक ढांचा सुदृढ़ बना रहे। गृहस्थ जीवन में रहते हुए भगवान का अभिषेक, साधु संतों को आहार दान और पूजन में आवश्यक द्रव्यों का उपयोग कर पुण्य अर्जन करना चाहिए। माताजी ने कहा कि अन्य योनियों (पर्याय) में जीव धर्म नहीं कर सकता, केवल मनुष्य जीवन में ही यह संभव है। सम्यक दर्शन को अपनाकर अपने भावों को सुधारें, क्योंकि भाव ही हमारे कर्म बंधों को तय करते हैं। धर्मसभा का शुभारंभ कुसुम पोरवाल द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। कार्यक्रम के दौरान चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन मानमल जैन, अभय मादावत, अनिल जैन (सेंट्रल बैंक) द्वारा किया गया। शास्त्र भेंट श्राविका मंडल ने किया।
अतिथि स्वागत डॉ. एस.एम. जैन, विजेंद्र सेठी, नंदकिशोर अग्रवाल, अरविंद मेहता ने किया।
धर्मसभा में आर्यिका 105 सार्थक श्री माताजी का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एस.एम. जैन ने किया एवं आभार शशि कुमार मिडा द्वारा व्यक्त किया गया।



