खेती नहीं, घोटाले की खेती’: मंदसौर कृषि विभाग के खिलाफ किसानों का मोर्चा, 3.09 करोड़ हजम, 1.34 लाख किसान आज भी कंगाल

खेती नहीं, घोटाले की खेती’: मंदसौर कृषि विभाग के खिलाफ किसानों का मोर्चा, 3.09 करोड़ हजम, 1.34 लाख किसान आज भी कंगाल
मंदसौर, 14 अप्रैल 2026 /मंदसौर की काली मिट्टी सोना उगलती है, लेकिन यहां कृषि विभाग के दफ्तरों में पिछले 8 साल से ‘घोटाले’ की फसल लहलहा रही है। कागजों पर किसान को सब्सिडी मिली, बीमा मिला, मुआवजा मिला। जमीन पर मिला तो सिर्फ धोखा, नोटिस और सीज हुआ बैंक खाता।
पढ़िए वो कड़वी सच्चाई, जिसे सुनकर कुर्सी पर बैठे साहबों को आंख मिलाने में शर्म आएगी।
नंबर 1: 2017-2019 – 1.5 लाख का पावर टिलर, थमाया 30 हजार का खिलौना
क्या हुआ: सरकार ने कहा किसान को 1.5 लाख के पावर टिलर पर 75 हजार सब्सिडी देंगे। पैसा सीधे किसान के खाते में जाएगा।
हुआ क्या: उप संचालक उद्यानिकी मनीष चौहान ने नियम को रद्दी की टोकरी में फेंका। 3.09 करोड़ की सब्सिडी सीधे 5 निजी कंपनियों के खाते में ट्रांसफर कर दी। किसान को 1.5 लाख का पावर टिलर नहीं, 30 हजार का रोटावेटर पकड़ा दिया। एक ही घर में 4-4 लोगों को यंत्र बांट दिए।
मतलब साफ है: किसान के नाम पर सब्सिडी निकली, किसान के घर घोटाला पहुंचा। 75 हजार की सब्सिडी भी गई, और यंत्र भी दो नंबर।
कार्रवाई: लोकायुक्त ने IFS अफसर सत्यानंद समेत 15 अफसरों और 5 फर्मों पर FIR ठोक दी। 3 साल की जांच के बाद भी पैसा वापस नहीं आया।
नंबर 2: 2002 का गेहूं, फैसला 2023 में – 21 साल तक सिस्टम सोता रहा
क्या हुआ: PDS का गेहूं जो गरीब किसान के चूल्हे तक जाना था, वो जिला सहकारी भंडार के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह गौतम और CEO मेहमूद ने खुले बाजार में बेच दिया।
21 साल बाद कोर्ट जागी: दिसंबर 2023 में 11 लोगों को जेल भेजा, इनमें 7 महिलाएं थीं।
सवाल: 21 साल तक गरीब का निवाला कौन खाता रहा? फाइलें किसके इशारे पर दबी रहीं?
नंबर 3: 2020 से आज तक – 1,34,409 किसानों के 281.60 करोड़ ‘तकनीकी त्रुटि’ में फंसे
मंदसौर के 1.34 लाख किसान आज भी फसल बीमा के 281.60 करोड़ के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। बीमा कंपनी कहती है ‘तकनीकी त्रुटि’, नेता कहते हैं ‘3-4 दिन में पैसा आएगा’। वो 3-4 दिन 2020 से पूरे नहीं हुए।
नंबर 4: अक्टूबर 2025 – दिवाली का मुआवजा देकर दिवाली ही छीन ली
सुवासरा के टोकड़ा गांव के 150 किसानों के खाते में सोयाबीन खराबे का मुआवजा डाला। किसान ने मिठाई खरीदी, बच्चों के कपड़े लिए। 3 दिन बाद तहसीलदार का नोटिस पहुंचा: ‘गलती से ज्यादा पैसा चला गया, वापस करो वरना कुर्की होगी’। बैंक खाते सीज।
किसान बोला:- ‘साहब, पहले हिसाब लगाते, फिर दिवाली क्यों फीकी की?
हिसाब की गोली: किसने कितना लूटा
घोटाला साल किसान का नुकसान सरकारी खजाने का नुकसान
उद्यानिकी यंत्रीकरण 2017-2019 75 हजार सब्सिडी + असली यंत्र नहीं मिला 3.09 करोड़ सीधे कंपनी को
PDS गेहूं 2002 BPL किसान को सस्ता अनाज नहीं पूरा स्टॉक बाजार में बिका
फसल बीमा 2020-2026 1.34 लाख किसान, 281.60 करोड़ अटका योजना पर से भरोसा उठा
मुआवजा रिकवरी अक्टूबर 2025 150 किसानों के खाते सीज प्रशासन की फजीहत
सबसे बडा सवाल: जवाब कौन देगा?
1. 3.09 करोड़ की सब्सिडी जब सीधे कंपनी को गई, तो फाइल पर साइन करने वाला कलक्टर-संभागायुक्त क्या कर रहा था?
2. 21 साल तक गेहूं घोटाले की फाइल किसके लॉकर में बंद थी?
3. 281.60 करोड़ 4 साल से ‘तकनीकी त्रुटि’ में है, तो तकनीक बदल दो या अफसर बदल दो। किसान क्यों मरे?
4. दिवाली पर मुआवजा देकर वापस मांगना ‘मजाक’ है या ‘मानसिक उत्पीड़न’?
जनता का दर्द: मंदसौर का किसान मौसम से लड़ लेता है, बाजार से लड़ लेता है, लेकिन ‘साहब’ की कलम से हार जाता है। यहां घोटाला करने वाला सस्पेंड नहीं होता, प्रमोट होता है। किसान आवेदन करता रह जाता है।
मांग सीधी है:-
1. यंत्रीकरण घोटाले के 3.09 करोड़ 15 अफसरों की सैलरी से वसूल हों।
2. 281.60 करोड़ बीमा का ब्याज समेत 30 दिन में भुगतान हो, वरना बीमा कंपनी का लाइसेंस रद्द हो।
3. मुआवजा रिकवरी नोटिस फाड़कर फेंके जाएं। गलती विभाग की, सजा किसान को क्यों?
मंदसौर में कुर्सी पर बैठा अफसर ‘किसान सम्मान निधि’ बांटता है, और पर्दे के पीछे ‘किसान का सम्मान’ नीलाम करता है। अब किसान फावड़ा नहीं, हिसाब की लाठी उठाएगा। क्योंकि घोटाले की फसल अब काटनी ही पड़ेगी, वरना अगली बुवाई ‘कुर्सियों’ की होगी।
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