शिलान्यास का शो…12 दिन बाद भी मल्हारगढ़ जनपद की 42 पंचायतो के मांगलिक भवनों का काम शुरू नहीं

शिलान्यास का शो…12 दिन बाद भी मल्हारगढ़ जनपद की 42 पंचायतो के मांगलिक भवनों का काम शुरू नहीं
बंशीदास बैरागी/ मल्हारगढ़ जनपद में विकास के नाम पर एक बार फिर “फीता काटो और भूल जाओ” वाली तस्वीर सामने आई है। महज 12 दिन पहले डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के हाथों 42 मांगलिक भवनों का भूमिपूजन बड़े धूमधाम से हुआ… मंच सजा, भाषण गूंजे, तालियां बजीं… लेकिन धरातल पर हालात शून्य! क़्या जनपद के जिम्मेदारी राजनीती की जड़ो से बंधे हुवे या फिर निर्माण कार्य शुरू करवाया जायेगा
मंच पर वादे, ज़मीन पर धूल-
मंच से दावा किया गया था—3 महीने में गुणवत्ता के साथ भवन तैयार होंगे, लेकिन 12 दिन गुजरने के बाद भी एक फावड़ा मिट्टी तक नहीं पलटी।
ग्रामीणों की जुबान पर अब एक ही सवाल क्या ये सिर्फ पंचायतो से राशि लेकर कार्यक्रम किया क़्या से सिर्फ फोटो सेशन था?”*_
42 पंचायतें इंतज़ार में, जिम्मेदार बेखबर!
बूढ़ा, लोडाखेड़ा, छायन, आक्याबिका, आंत्री खुर्द, कनघट्टी, काचरिया कदमाला, कित्तूखेड़ी, भांगी पिपल्या, गरनाई गुड़भेली, आक्या पालरा, डोडिया मीणा, ढीकनिया, तलाव पिपल्या, तुर्किया, डोरवाड़ा, नेनोरा, पहेड़ा, पिपल्या रायसिंह, आवना काचरिया, बंड पिपल्या, खात्याखेड़ी, लसुड़िया कदमाला, बही, बाबुखेड़ा, बिल्लोद, बालागुड़ा, काचरिया देव, मोल्या खेड़ी, रतन पिपल्या, लसुड़िया राठौर, लूनाहेड़ा, सरवानिया, सिंदपन, सुदवास, सेमली, सोनी, कचनारा, हाथी बोलिया, हिंगोरिया बड़ा, गर्रावद—हर गांव में सिर्फ उम्मीद खड़ी है,भवन नहीं।
बड़ा सवाल जिम्मेदार कौन?
क्या टेंडर अटका या फाइलों में फंसा विकास? या फिर घोषणाओं का गुब्बारा फूट गया? क़्या किसी चहेते को निर्माण कार्य का ठेका देने का इंतजार तो नहीं सभी मांगलिक भवनो का निर्माण कार्य को लेकर जनता का गुस्सा
ग्रामीणों का साफ कहना हैअगर काम शुरू ही नहीं हुआ, तो 3 महीने में पूरा कैसे होगा?”माननीय मंच से बोलकर चले गए, अब कोई देखने तक नहीं आया!”
मल्हारगढ़ जनपद में 42 मांगलिक भवनों का भूमिपूजन अब विकास नहीं, सवाल बन गया है।अगर जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो ये मामला राजनीतिक वादों की पोल खोलने वाला बड़ा मुद्दा बन सकता है*_
इस मामले को लेकर जनपद क्षेत्र के सहायक यंत्री शशांक रमन से उनके दूरभाष मोबाइल पर सम्पर्क करना चाहा मगर महाशय द्वारा मोबाइल कॉल उठाना मुनासिफ नहीं समझा
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