आलेख/ विचारमंदसौर

रामराज्य की ओर एक कदम आगे बढ़ाता भारत शुभ शगुन

रामनवमी विशेष-
रामराज्य की ओर एक कदम आगे बढ़ाता भारत शुभ शगुन
-बंशीलाल टांक
आज सम्पूर्ण भारत भगवान राम के जन्म महोत्सव के पावन पर्व पर एक बार पुनः भगवान राम की महान धरा गौरवमयी वसुन्धरा भारत में राम राज्य की कल्पना को 9 लाख से अधिक त्रेतायुग के राम राज्य के आगमन की खुशी में बड़े हर्षोल्लास-आनन्द-उमंग-उत्साह-उल्लास से राम जन्म महोत्सव मना रहा है।
मनाना चाहिये, यह हमारे लिये परम गौरव का मंगलमय अवसर है परन्तु जहां तक राम राज्य की कल्पना है हमें वास्तव में राम के राज्य का संविधान क्या था- कैसा था राम राज्य इसके लिये कहीं जाने-खोजने-ढूंढने-अनेक ग्रंथों का पढ़ने-समझने-संस्कृत का पठन-पाठन-अभ्यास की आवश्यकता नहीं भगवान के रामराज्य का संविधान हमारी सरल लोकभाषा में गोस्वामी तुलसीदासजी के रामचरित मानस के अंतिम सोपान उत्तरकाण्ड के दोहा क्रमांक 19(ग) के पश्चात् चौपाई क्रमांक 7 राम राज बैठे ……. से दोहा क्रमांक 26 तक विशेष है परन्तु जो मुख्य रूप से दोहा क्रमांक 21 तक को राम राज्य की प्रतिष्ठापना का मुख्य आधार अवश्य बनाया जाना चाहिये।
ये है राम राज्य स्थापना संविधान के मुख्य बिन्दू –
राम राज बैठें त्रैलोका। हरषित भए गए सब सोका।
बयरु न कर काहू सन कोई। रामप्रताप विषमता खोई।।
बरनाश्रम निज निज धरम निरत बेद पथ लोग।
चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहिं भय सोक न रोग।।
दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती।।
चारिउ चरन धर्म जग माहीं। पूरि रहा सपनेहुँ अघ नाहीं।
राम भगति रत नर अरु नारी। सकल परम गति के अधिकारी।।
अल्पमृत्यु नहिं कवनिउ पीरा। सब सुंदर सब बिरुज सरीरा।
नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना।।
सब निर्दंभ धर्मरत पुनी। नर अरु  नारि चतुर सब गुनी।।
सब गुनग्य पंडित सब ग्यानी। सब कृतग्य नहिं कपट सयानी।।
राम राज नभगेस सुनु सचराचर जग माहिं।
काल कर्म सुभाव गुन कृत दुख काहुहि नाहिं।।
यदि उक्त सिद्धांतों को रामराज्य स्थापना में सम्मिलित कर लिया जाये तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा रामराज्य का सपना साकार हो जायेगा। सबको रामनवमी महापर्व की हार्दिक मंगल शुभकामनाएं। जय श्री राम।

बंशीलाल टांक

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