मंदसौरमध्यप्रदेश

राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संसोधन विधेयक को सदन में किया संबोधित

राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संसोधन विधेयक को सदन में किया संबोधित

 

मंदसौर। 12 अगस्त बुधवार को राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संसोधन विधेयक पर अपने उद्बोधन के दौरान सदन संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संसोधन विधेयक 2026, 1962 के अधिनियम के संसोधन को प्रस्तावित करता है एनसीडीसी के ध्यान को पंजीकृत सोसायटीयों के वित्त पोषण को बढावा देकर वित्त पोषित करने तथा विस्तारित करने के लिए संसोधन में अनेक प्रावधान किये गये है। यह विधेयक सहकारिता विकास के साथ ही सहकारिता के क्षेत्र को व्यापक बढावा देते हुए प्रसंस्करण भोजन खाद्य उत्पादों एवं केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित अन्य खाद्य वस्तुआेंं को शामिल करने के लिए एनसीडीसी की सीमाओं को विस्तारित करता है।

श्री गुुर्जर ने कहा कि विधेयक से यह सीमा हटा दी गई है कि कुछ औद्योगिक वस्तुओं और हस्तशील्प को छोडकर ग्रामीण क्षेत्र तक सीमित रखा जायें जिन्हें सहकारिता के व्यापक क्षेत्र तक बढाया जा सके। जिससे एनसीडीसी का दायरा व्यापक हो सके। यह विधेयक पुराने अधिनियमों को अपडेट करता है सहकारिता अधिनियम 1984 के संदर्भ को 2002 के प्रावधानों से बदलना शामिल ही साथ ही कुछ आवश्यक प्रावधनों को हटाया भी है। विधेयक सहकारिता क्षेत्र मेंं काम करने वाली संस्थाओं को ऋण एवं अनुदान प्रदान करने की अनुमति देता है पर शर्त है कि यह इस उपयोग सहकारिता संबंधित गतिविधियों में किया जायें। अधिनियमों को सहकारिता विकास को बढावा देने के लिए यह विधेयक केन्द्र सरकार की अनुमति से सहाकरिता के क्षेत्र में सहयोग करने वाली संस्थाओं के शेयर पंूजी में भी निवेश करने की अनुमति देता है।

धारा 9 ए और धारा 13 ए को शामिल करने से सहाकारिता ढांचा मजबूत होगा।

सरकार के सहाकरिता के विजन को मजबूत करने के लिए यह विधेयक 1962 में बनायें गये 6 दशकों पुराने बनाये गये कानून को आधुनिकरण प्रदान करता है ताकि सहकारिता के ढांंजे को आज के भारत के हिसाब से बनाया जा सके लम्बे समय से भारत का सहकारिता ढांचा ऐसे कानून के दायरे में संचालित हो रहा था जो पुराने कानून को आवश्यकता को ध्यान में रखकर बनाया गया था उस विधेयक में सहकारिता के लिए पर्याप्त स्थ्ज्ञन नही था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा सहकार से समृद्व की सेचा को यह विधेयक एनसीडीसी को आवश्यक लचीलापन एवं व्यापक अधिकार प्रदन करता है ताकि सहकारी संस्थाएं ग्रामीण विकास की वास्तविक परिस्थितियों को जान सके 1962 का कानून 2026 की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित नहीं कर सकता था 1962 में 2026 का भारत 1962 का भारत नहीं है फिर भी एनसीडीसी का इस पूराने कानून को ढो रहा था सहकारिता समितियां केवल ग्रामीण समितयों तक सिमित नहीं है यह अब डैयरी उत्पादन, खाद्य प्रस्संकरण हस्तशील्प, भंडारण इसलिए मोदी सरकार यह संसोधन लाई है ताेिक सहकारिता नियम आधुनिक भारत की जरूरतों से तालमेल बैठा सके सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले एनसीडीसी की भूमिका वित्त्त पोषित संस्थाओं तक समिति थी लेकिन अब इसका पैमाना बढा है सहकारिता क्षेत्र मे पैक्स अच्छा कार्य कर रह है पैक्स मप्र में शून्य ब्याज पर ऋण उपलब्घ करवाती है इससे किसानों को लाभ होता है। राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम संसोधन विधेयक भारत के सहकारिता के ढांचे को मजबूत करेगा।

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