झालावाड़पचपहाड़ (Pachpahar)योजना

राजस्थान सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौशाला और पंचायत समिति स्तर पर नन्दीशाला स्थापना के 16 फरवरी तक आवेदन मांगे

राजस्थान सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौशाला और पंचायत समिति स्तर पर नन्दीशाला स्थापना के 16 फरवरी तक आवेदन मांगे

भवानीमंडी, 4 फरवरी। ( जगदीश पोरवाल )

राजस्थान पशुपालन विभाग द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर गौशालाओं तथा पंचायत समिति स्तर पर नन्दीशालाओं की स्थापना हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस योजना के तहत न केवल निराश्रित एवं बेसहारा गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा।

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक टी.ए. बंसोड ने बताया कि इच्छुक ग्राम पंचायतें, संस्थाएं एवं गौशालाएं 16 फरवरी 2026 तक आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं। आवेदन संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग, मिनी सचिवालय, झालावाड़ में निर्धारित शुल्क के साथ ऑफलाइन जमा किए जाएंगे।

योजना में 90 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार देगी :-

सहभागिता पशु आश्रय स्थल योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत गौशाला का निर्माण लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।

योजना लागत का 90 प्रतिशत व्यय राज्य सरकार वहन करेगी।शेष 10 प्रतिशत अंशदान संबंधित संस्था या ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा।

मुख्य शर्तें :-

आवेदक के पास कम से कम 5 बीघा (लगभग 8,000 वर्गमीटर) भूमि स्वयं के नाम पर होना अनिवार्य। भूमि विवादमुक्त एवं निर्माण योग्य हो।

संयुक्त निदेशक ने बताया कि जिले में 8 ग्राम पंचायतों—तारज, धानोदाकलां, कंवल्दा, आंकखेड़ी, गणेशपुरा गरनावद, गुराड़ियाजोगा, रामपुरिया एवं पीपलियाखुर्द—में गौशालाओं की स्थापना की प्रक्रिया प्रगतिरत है। वहीं, वर्तमान में 195 गौशाला-विहीन ग्राम पंचायतों के लिए निविदाएं जारी की गई हैं।

पंचायत समिति स्तर पर नन्दीशाला की योजना

पंचायत समिति स्तर पर नन्दीशाला की स्थापना हेतु 1.57 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है।

जिले की कुल 8 पंचायत समितियों में से झालरापाटन पंचायत समिति में नन्दीशाला का निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि शेष 7 पंचायत समितियों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं।

पात्रता की शर्तें :- आवेदक संस्था या गौशाला के पास कम से कम 10 बीघा (लगभग 16,000 वर्गमीटर) भूमि स्वयं के नाम पर हो।भूमि सभी वैधानिक मापदंडों के अनुरूप हो।

पशुपालन विभाग की अपील- संयुक्त निदेशक टी.ए. बंसोड ने पात्र ग्राम पंचायतों, संस्थाओं एवं गौशालाओं से अपील की है कि वे समय रहते सभी शर्तों की पूर्ति कर 16 फरवरी 2026 तक आवेदन प्रस्तुत करें, ताकि जिले में गौवंश संरक्षण की व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं व्यवस्थित बनाया जा सके।

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