उज्जैन में शक्तिपीठों पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ, 51 शक्तिपीठ पुस्तक का विमोचन

उज्जैन में शक्तिपीठों पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ, 51 शक्तिपीठ पुस्तक का विमोचन
उज्जैन, 8 अक्टूबर 2026। शक्ति उपासना के वैश्विक केंद्र उज्जैन में #शक्तिधाम_न्यास द्वारा आयोजित शक्तिपीठों की तीसरी राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ आज अत्यंत हर्षोल्लास के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत हरसिद्धि माता मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा से हुई, जो झालरिया मठ स्थित कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। मंच पर कलश स्थापना और ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात मंगलाचरण और अतिथियों का सत्कार किया गया।
इस अवसर पर शक्तिपीठों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जो आकर्षण का केंद्र रही।
स्वागत और वैचारिक सत्र: डॉ गोविन्द गंधे निदेशक कालिदास अकादमी,ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।प्रशांत हड़तालकर अध्यक्ष शक्तिधाम न्यास, ने शक्तिधाम की परिकल्पना रखते हुए कहा – “जहाँ शक्ति है, वहाँ शिव है। यह शक्तिपीठों की तीसरी कॉन्फ्रेंस है। हमारे देश में 51 शक्तिपीठ हैं और सभी भारत के उपखंड में ही स्थित हैं, इसका ज्ञान हम सबको होना चाहिए।” उन्होंने आगम-निगम की कथा सुनाते हुए कहा कि जब पार्वती जी ने त्याग के लिए स्वयं को आगे किया, तब शिव जी ने भगवती का रूप लेकर तांडव किया और जहाँ-जहाँ भगवती के अंग गिरे वहाँ शक्तिपीठ बने। बिना शक्ति के कोई कार्य संभव नहीं। उन्होंने महाकाल बाबा से इस कार्य की सिद्धि के लिए प्रार्थना की।प्रहलाद पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा, “माँ भगवती की उपासना में संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता। शक्तिपीठों की पुनर्स्थापना करना श्रेष्ठ कार्य है। आत्मा सबकी एक है, पर शरीर अलग-अलग हैं।”मुख्य वक्ता श्री सुरेश उपाख्य “भैयाजी” जोशी ने शक्तिपीठ के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह चौथा युग चल रहा है। सतयुग में धर्म के चार स्तंभ थे, द्वापर में दो बचे और कलियुग आते-आते सत्य चला गया। अब पुनः सत्य युग आने वाला है और दैवीय शक्ति के कारण ही धर्म स्थापित होगा। भारत की भूमि देवभूमि है, शक्ति संपन्न है। विश्व के कल्याण का मार्ग भारत से होकर ही जाएगा। एक दूसरे का सम्मान करो, सज्जन शक्ति जरूर आएगी।” श्री धर्मेन्द्र लोधी राज्य मंत्री,संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास पी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा, “यह वो ऐतिहासिक नगरी है जहाँ काल भी आराध्य है और जहाँ कृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की थी। सनातन एकता का संदेश देता है। यह महाकाल की नगरी उज्जैन है।”कार्यक्रम में संतश्री रतेशदास बैरागी, संतश्री आदित्य वल्लभ, स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में श्री गोविन्द गंधे जी ने आभार प्रदर्शन किया।
तकनीकी सत्र:प्रथम तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. रवीन्द्र भट्टाचार्य रहे। विशिष्ट वक्ता के रूप में जया प्रभु (कोयम्बटूर), श्री हिमाद्री शर्मा (कामाख्या) और विरुपाक्ष जड़ीपाल उपस्थित रहे। इस सत्र में पुस्तक “शक्तिपीठ में छिपा विज्ञान” का विमोचन किया गया। सत्र का संचालन बीरेश्वर मुखर्जी ने किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता देवनारायण झा, राजनाथ तिवारी, महंत अगस्त्य द्विवेदी (अमरकंटक शक्तिपीठ) और स्वामी असंगानंद महाराज उपस्थित रहे।
संपूर्ण कार्यक्रम शक्तिधाम न्यास के सचिव श्री राकेश शर्मा के निर्देशन में सम्पन्न हुआ ।


